Friday, December 15, 2017
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sl.num.004 बढ़ जाने दो गलत-फहमियाँ….mishra’s lover

Sl.num.004 दिन ,सफते और महीने बड़े ही तेजी से गुजर रहे थे । कभी-कभी रोज , कभी कुछ दिन के बाद , तो कभी कुछ ज्यादा दिन के बाद ,अब कही

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sl.num.002 दूसरी बार……mishra’s lover

Sl.num.2 dec 2011 परसों के बाद मुझे वो कल फिर से मिली थी और आज का देखते है ऊपर वाले की क्या मर्जी है । अक्सर वो हुमे कोचिंग से आती हुयी मिलती है न की जाते हुये ,

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sl.num.001 जब मैंने उसे पहली बार देखा था …..mishra’s lover

Sl.num.001 dec 2011 वेसे रोज रोज नहीं मिलती वो मुझे ,लेकिन हाँ महीनो और सफतों के हिसाब से मिलती जरुर है ,कभी-कभार, आते जाते रास्ते मे कहीं। मुझे नहीं पता

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