Thursday, November 15, 2018
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best moral stories /व्यवहार,नीयत और सोच /stories in hindi/raaja aur naukar

moral story in hindi

एक दिन एक राजा के दरबार मे एक अजनवी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया /
तो जब उससे उसकी काबिलियत पुछी गयी ,

तब उसने बताया , की में आदमी हो चाहे जानवर ,शक्ल देख कर उसके बारे मे बता सकता हु /
राजा ने ये सोचा की ये आदमी बहुत काम आ सकता है तो राजा ने उसे अपने खास ”घोड़ो के
अस्तबल का इंचार्ज बना दिया /

कुछ दिनो के बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसंद घोड़े के बारे मे पूछा ,
”नौकर ने कहा ,”महाराज ये आपका घोडा नस्ली नहीं है /”
इतना सुनकर राजा को बड़ी हैरानी हुई ,उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा ,
”घोड़े वाले ने बताया , महाराज घोडा नस्ली तो है ,पर इसके पैदा होते ही इसकी माँ मर गयी
थी ,ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है /

अब राजा ने अपने नौकर को बुलाया और उससे पूछा तुम को कैसे पता चला के घोडा नस्ली नहीं है ?
नौकर ने कहा ,”महाराज जब ये घोडा घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके खाता है ,
जबकि नस्ली घोडा घास मुह मे लेकर सर उठा लेता है /

राजा उसकी काबिलियत से बहुत खुश हुआ ,और उसने नौकर के घर अनाज ,घी ,मुर्गे और अंडे
वतौर इनाम उसके घर भिजवा दिये /और उस नौकर को रानी के महल मे तैनात कर दिया /

कुछ दिनो बाद ,राजा ने उस से रानी के बारे मे राय मांगी ,नौकर ने कहा ,”महाराज, महारानी के
तौर तरीके तो रानी जैसे है लेकिन ये पैदाइशी रानी नहीं है /” best stories in hindi

राजा के तो मानो पैरो तले जमीन खिसक गई ,उसने अपनी सास को बुलाया ,पूरी बात उसको
बतायी ,सास ने कहा ”हकीकत ये है ,की आपके पिता जी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश
पर ही रिस्ता मांग लिया था ,लेकिन हमारी बेटी जन्म से 6 माह के बाद ही मर गयी थी ,लिहाजा
हम ने आपके रजवाड़े से रिस्ता बनाए रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया /”

राजा ने फिर अपने नौकर को बुलाकर पूछा ”रानी के बारे मे तुम को इतना कैसे पता चला ?
‘नौकर ने कहा ,”महाराज रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गवारों से भी बुरा है /’
जो इंसान खानदानी होता है उस इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता है, जो
रानी साहिवा मे बिलकुल नहीं है /

राजा फिर एक बार उसकी काविलियत भरी नजरों से बहुत खुश हुआ और उसकी बहुत तारीफ की
और एक बार फिर से अनाज ,भेड़,बकरिया बतौर इनाम उसके घर भिजवा दी साथ ही साथ इस बार
उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया /

कुछ वक्त गुजरा ,राजा ने एक बार फिर नौकर को बुलाया , और इस बार उसने अपने बारे मे पूछा /
नौकर ने कहा ,”महाराज अगर जान की सलामती हो तो कुछ कहू/”राजा ने वादा किया /
नौकर ने कहा ,”महाराज न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओ वाला है /”
इतना सुनकर राजा आग बबूला हो गया ,मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था ,राजा उठ खड़ा
हुआ और सीधा अपनी माँ के महल पहुंचा /सारी बात माँ को जा बताई माँ ने कहा ,”ये सच है ,की तुम
राजा के बेटे नहीं हो तुम एक चरवाहे के बेटे हो ,हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हें गोद लेकर हम ने सिर्फ
पाला है /”

राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा ,बता ”तुझे कैसे पता चला की न तो मे राजा का बेटा हु और न
ही मेरा चाल चलन राजाओ जैसा है ?”नौकर ने बड़ी ही शालीनता के साथ जबाब दिया ,”महाराज जब राजा
किसी को इनाम दिया करते है तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल मे देते है …लेकिन आप भेड़ ,बकरियाँ ,
खाने पीने की चीजे दिया करते है .ऐसा रवैया किसी राजा का नहीं किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है /”

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तो कहानी का तात्पर्य यह है जनाब की किसी इंसान के पास कितना बाहरी दिखावा, धन , दौलत,सुख,
स्मरधी ,रुतबा इत्यादि है ये सब बाहरी दिखावा है /इंसान की असली पहचान उसके व्यवहार ,उसकी सोच
और उसकी नीयत से होती है…

इसीलिए बदलना है तो अपनी सोच और व्यवहार को बदलिए इज्जत, रुतवा और सुख जैसे कई आनंद
इनके पीछे पीछे दौड़े चले आएंगे…

दोस्तो आपको ये heart touching story कैसी लगी हमे जरूर बताए जिससे आपकी प्रतिक्रियाए पता लगे सबसे बड़ी बात ये एक अच्छा  संदेश है तो सभी के साथ share जरूर करे हम आपके लिए और भी ऐसी कहानियाँ लाते रहेंगे /आप हमारी website और भी love story,love shayari और love quotes पढ़ सकते है और उन्हे copy करके share भी कर सकते है धन्यवाद

 

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raaj rathore
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