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sl.num.011 हमारी उन्नति काफी जोरों पर थी mishra’s lover

sl. num.11 एक दो दिन मे भैया ने पम्पलेट छपा ली । और फिर भैया ने कहा की इन सब को कल चिपकाना है । लेकिन आखिरी निर्णय ये था की हम लोग खुद ही उनको हर जगह चिपकाएँगे।। मुझे कोई ऐतराज नहीं था इस बात से ,समय निश्चित हुआ अगले दिन सुबह 4

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sl.num.009 देख मे डाइरैक्ट पॉइंट पर आता हु । mishra’s lover

serial no. 9 फोन बज रहा था मेरा , डिस्प्ले देखा तो पता चला श्यामू भैया का फोन था । मैंने कॉल अटेण्ड की और बोला ,'' हाँ भैया '' उधर से आवाज आई ,'' कहाँ है ????'' में बोला ,'' घर पर '' श्यामू भैया ,''पाँच मिनट मे मेरे घर आजा । '' इतना कह कर

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