Thursday, December 14, 2017
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sl.num.037 मेरी किस्मत उसके साथ-साथ चलती है… mishra’s lover

sl.num.37 first week of september2012...... उस दिन के बाद मे कॉलेज नहीं गया,exam के लिए काफी कम समय बचा हुआ था,और मुझे कुछ ज्यादा किताबे कवर करनी थी। कुछ किताबे तो मुझे अपनी कोचिंग मे पढ़ने वाली विध्यार्थियों से मिली ,12th class क batch पढने वालो

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sl.num.036 मैंने तो आपको तुरंत ही पहचान लिया था ,” वो बोली mishra’s lover

sl.num. 36 mishra's lover अगले दिन साइकिल स्टेंड के पास ...... साइकिल स्टेंड के पास ही एक सीडिया है जिन पर मे अक्सर बैठ जाया करता था । सबसे पहली बात - बैठनेके लिए बो एक unique जगह थी , दूसरी बात ,- वहाँ से कॉलेज की building से बाहर का नजारा काफी अच्छा

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sl.num.035 same day…कलकत्ता जितनी दूर जगह में पहले कभी नही गया था…mishra’s lover

sl num 35. same day ...... continue शाम को जब मै,भैया के घर पर ही बच्चो को ट्यूसन

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sl.num.034 दिल से तो बोलना चाह रहा था ,पर जुवान मेरे दिल का साथ नही दे रही थी mishra’s lover

sl num 34.... continue... अन्ततः मैने गेट के पीछे खडे रिम्पी की ओर देखा,वो पहले से ही स्थिति से पूरी तरह बाकिब था,उसने भी अपने हाथो व चेहरे के एक्स्प्रेसन से मुझे बोल के लिये इशारा किया,वो

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sl.num.033 मै उस एह्सास को मह्सूस करना चाहता था,जो उसके छूने के बाद उन किताबो मै आ गया था mishra’s lover

Sl.num.33. continue... मै उस एह्सास को मह्सूस करना चाहता था,जो उसके छूने के बाद उन किताबो मै आ गया था| किताबो को यथास्थान रखने के

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