Thursday, December 14, 2017
Home > college days > sl.num.003………शायद तीसरी बार… mishra’s lover

sl.num.003………शायद तीसरी बार… mishra’s lover

SL.num.3. Dec 2011

पिछले सात आठ दिनो से समय, सही ढंग से मैच नहीं कर पाया।
इसी बजह से,हो सकता है, मुझे बो एक दिन भी नहीं नजर आयी। वेसे इसकी
कोई और भीबजह हो सकती है वो तो ऊपर वाला ही जाने।

वेसे भी आज सुबह से ही मौसम साफ नहीं था सर्द हवाए भी चल रही थी ,
कोहरे ने भी अपना प्रकोप फेला रखा था, थोड़ी दूर का रास्ता भी साफ नहीं नजर
आ रहा था,रास्ते पर जितना आगे बढ़ते उतना आगे का रास्ता नजर आना शुरू हो
जाता और इसके एकदम विपरीत पीछे का उतना ही रास्ता गुम होता चला जाता।
मुझे तो ऐसा लग रहा था मानो कि मे किसी जादुई दुनिया मे घूम रहा हु।
हमेशा की तरह हम वापस घर ही लौट ही रहे थे।एकदम मस्त अपनी मस्ती मे
झूमते हुये बस बढे जा रहे थे। पर कही न कही दिल मे एक आस तो थी की शायद
वो अंजान चेहरा मुझे आज दिखे।परंतु ऐसा कुछ होना नहीं था।मे बैजल कनफेकसनरी
पार कर चुका था और तहसील तिराहा से निकल कर बैंक ऑफ इंडिया की तरफ बढ़
चला था।जैसे- जैसे मे साइकल के पैडल मार रहा था ।मेरे दिल मे जो आस थी उस
अंजान से चहेरे को देखने की वो कम होती जा रही थी। क्यूंकी जो जगह मे छोडता
चला जा रहा था,अब तक तो वो उसी पर दिखी थी,और वो भी कुछ लिमिटेड एरिया
मे ही । इसलिए शायद आगे दिखने के चान्स ही खत्म हो जाते है । मेरे चेहरे की
उत्सुकता भी कम हो चुकी थी,मे ठीक बैंक ऑफ इंडिया के सामने ही था, सामने का
रास्ता और क्लियर हुआ। उस साफ होते हुये कोहरे से कुछ धुंधला सा नजर आया ,
अगर मेरा अनुमान गलत नहीं है तो शायद ये वही अंजान चेहरा था,पर मे अभी तक
पूरी तरह पक्का नहीं था , वो धुधला सा चेहरा थोड़ा और मेरी तरफ बढ़ा, अब मुझे
पूरी तरह से यकीन हो चुका था।हाँ ये वही चेहरा था।मेरे चेहरे पर थोड़ी सी चमक बढ़
गयी ।आज कुछ कुछ बदला सा नजर आ रहा था , उसके चहरे पर भी ।उदाहरण के
तौर पर ,जेसे की आज उसकी नजरे झुकी हुयी नहीं थी, ऐसा लग रहा था मानो कुछ
ढूंढ रही हो,न सिर्फ आँखें बल्कि आज चेहरा भी ऊपर की तरफ उठा हुआ था ।अब मे
उसके इतने पास मे था की बो मुझे ठीक से देख सकती थी, उसकी नजरे इधर उधर
घूमते हुये थोड़ी देर के लिए मुझ पर रुकी, मेरी नजरे उसकी नजरो से ठीक से टकराई
भी नहीं ,उससे पहले ही मेरी हिम्मत ने जबाब दे दिया और मे इधर उधर देखने लगा।
ठीक 3 सेकंड बाद मैंने थोड़ी सी कोशिश की और एक बार फिर उसकी तरफ देखा,……
रब्बा खेर करे ,,,,
बो अभी तक मुझ पर ही थी। ऐसा लगता है जेसे अभी तक उसने एक बार भी पलक
नहीं झपकाई होगी। मे भी उसका सामना करते हुये 1 सेकंड के लिए उस पर रुका।मानो
थोड़ी देर के लिए समय रुका।अबकी बार हम दोनों ने एक साथ एक दूसरे पर से नजरे
हटायी। इसका ज्यादा कुछ होने से पहले ही हम दोनों एक दूसरे को क्रॉस कर चुके थे।
उसके बाद मेरे दिल ने गवाही नहीं दी की मुझे पीछे मुड़ने की जरूरत है । कुछ पल के
लिए मानो मेरा खून जम चुका था। क्या हुआ था मुझे समझ ही नही आ रहा था । सब
कुछ पहले जैसा ही था फिर भी न जाने क्यू अजीब सा महसूस हो रहा था । धीरे – धीरे
कर के मेरी साइकल की स्पीड अपने आप बढ़ती जा रही थी । मेरे पैर पेडलों को और
ज्यादा ताकत से धकेलते जा रहे थे। पीछे की दुनिया खत्म होती जा रही थी । आगे की
दुनिया मे और फूल नजर आ रहे थे।कुछ चमकते हुये तो कुछ खिलते हुये । कोहरा कम
होने का नाम नहीं ले रहा था और मे रुकने का ।मे बस बढ़े जा रहा अपनी घर की ओर
…..अपने घर की ओर to be continued
.
.
.
.
.mishra’s lover

Please follow and like us:
raaj rathore
hi, my name is raaj rathore i belongs to shikohabad uttar pradesh. i am the author of this site. this site mainly contain a story which is written by me and i update it time to time that is why this story keep moving. i feel very happy when my readers reads my story and left with like and wonderful comments.thios things also give me motivation to keep writing. writing is my passion somewhere, which i come to konw few years back so i started writing.so my writing passion converted into mishra's lover story and that story converted into mishraslover.com......so that all ...i write it here. so friends be with me and for any query,suggestions and assistance you can contact me through contact us page and feel free to contact us.
http://mishraslover.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)