Thursday, December 14, 2017
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sl.num.011 हमारी उन्नति काफी जोरों पर थी mishra’s lover

sl. num.11

एक दो दिन मे भैया ने पम्पलेट छपा ली । और फिर भैया ने कहा

की इन सब को कल चिपकाना है । लेकिन आखिरी निर्णय ये था

की हम लोग खुद ही उनको हर जगह चिपकाएँगे।। मुझे कोई ऐतराज

नहीं था इस बात से ,समय निश्चित हुआ अगले दिन सुबह 4 बजे सब

को एक जगह मिलना था औए बो जगह भैया का घर था । उसके

बाद पूरा आवास विकास ,गढ़ैया मुहल्ला ,मैनपुरी तिराहे वाली रोड ,

एटा तिराहे वाली रोड की हर गली , हर दीवार, हर नुक्कड़ पर हमने कोचिंग के

पर्चे थोप दिये ।

ऐसा करते करते लगभग 3 घंटे पूरे हो गए थे।यानि की सुबह के 7 बज

चुके थे ।कुछ लोग जॉगिंग करके घर लौट रहे थे, और कुछ काम के

लिए निकल रह थे , बच्चे स्कूल जा रहे थे । लेकिन वहाँ से गुजरने

वाला हर इंसान हमारे काम को जरूर देख रहा था ।कुछ नमूने तो

ऐसे भी थे , जो खड़े हो कर पर्चे भी पढ़ने लगते थे , और कुछ का

बिना पूछे पेट नहीं भर रहा था ,हालांकि हुमे बताने मे भी काफी खुशी

हो रही थी ।

कभी भैया पर्चे पर गोंद लगा लगा के मुझे देते तो मे उन्हे दीवारों

पर लगाता और कभी मे पर्चो पर गोंद लगा-लगा कर भैया को देता

तो भैया उनको दीवारों पर लगा देते।क्यूंकी पार्टी के बाकी सारे मेम्बर

जा चुके थे। सिर्फ में और भैया ही बचे थे।वेसे भी अब हमारा काम

लगभग खत्म होने की कगार पर ही था ।

इसलिए हमारी आँखों मे सुकून साफ नजर आ रहा था। तीन घंटे मे

काफी मेहनत कर डाली थी हमने क्यूंकी इतना बड़ा एरिया कवर

करना कोई छोटा काम तो नहीं था ।

एक दो दिन बाद बाकी का सारा समान भी बन कर तैयार हो

गया । बेंचेस ,कुर्सी ,टेबल,व्हाइट बोर्ड ,मार्कर सब कुछ ,अब सिर्फ

काम बचा था तो उनको कोचिंग पर पहुंचाना , लेकिन सब ने साथ

मिलकर इस काम को भी अंजाम दे दिया ।

तो आखिरकार बो दिन भी आ गया । जब हुमे हमारी कोचिंग का

शुभारंभ करना था । अब जिस तरह से गृह प्रवेश करना होता है ,

ठीक उसी तरह कोचिंग प्रवेश भी होना था । तो हमने बो दिन भी

निश्चित कर लिया ।

पर इस काम के लिए हमने पंडित जी को नहीं बुलाया ,बल्कि सब

ने मिल के खुद ही पूजा-अर्चना करके सरस्वती माता को वहाँ स्थापित

कर लिया । और कोचिंग का शुभारंभ भी कर दिया ।

सबसे पहले हमारे पास जो भी स्टूडेंट थे हमने उन को कोचिंग पर

पढाना शुरू किया। जिससे कोचिंग पर रौनक रहने लगी। उसके बाद

सबके स्टूडेंट बढ्ने लगे । मेरा भी एक बैच 9th का और

दूसरा बैच 10th का शुरू हो गया। पर अभी ज्यादा स्टूडेंट

नहीं थे ।पर धीरे-धीरे बाकी सारे लोगो के भी स्टूडेंट धीरे धीरे बढ्ने लगे । और

इस तरह सभी लोगो के बैच शुरू हो गए। हम सब को भी, अब

पढाने मे मजा आने लगा था ।एक दो महीने गुजरे ,धीरे धीरे हम

सभी लोगो के क्लास बढ़ गए यानि की स्टूडेंट्स की संख्या और बढ़ गयी।

मेरा भी 10th का बैच बड़ा हो गया था । और अब तो मुझे भी

पढ़ाने मे ज्यादा मजा आने लगा था।भैया का कोचिंग खोलने का

मकसद कामयाब होता नजर आ रहा था । जो की उनके चेहरे की

खुशी खुद ब खुद सब कुछ ब्यान कर देती थी। क्यूंकी हमारा इरादा बच्चो

को अच्छी से अच्छी शिक्षा देना था । 2-3 महीनो की मेहनत के

हिसाब से हमारी उन्नति काफी जोरों पर थी ।और इस तरह हमारी कोचिंग

काफी रफ्तार पकड़ चुकी थी।to be continued …

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….mishra’s lover

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raaj rathore
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