Thursday, December 14, 2017
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sl.num.013 वो चाँद से चेहरे वाली mishra’s lover

sl.num.13           feb 2012


मैंने अपने दोपहर का आखिरी बैच खत्म किया । उसके बाद मुझे

अपनी 5 बजे karate क्लास जानी होती थी । और अभी

सिर्फ 4 ही बजे थे। मेरा एक 10 क्लास का स्टूडेंट था ….. शादान

खान।अच्छा बच्चा था स्मार्ट,क्यूट और इंटेलिजेंट।उस दिन शादान मुझसे

बोला,की उसे बड़े डाक खाने मे कुछ काम है । और मे उसका बो

काम कराने मे मदद कर दु ।मुझे तो वेसे भी क्लास जाने के लिए

बाजार से ही हो कर जाना पड़ता था ।तो भला मुझे क्या समस्या

हो सकती थी। मैंने उससे कहा मुझे कोई समस्या नहीं है ,मे क्लास

जाते-जाते , जो भी उसका काम है , करवा दूंगा।हम दोनों साइकल

से बड़े डाक खाने पहुंचे । उसका काम खत्म करने के बाद हम डाक

खाने से बाहर ही खड़े थे और वहाँ से निकल कर,हम बाजार की और

चलने ही वाले थे । तभी मैंने देखा , ”बो चाँद से चेहरे वाली और

उसकी कोई एक सहेली दोनों शायद ट्यूसन जा रहे थे,मे उसे काफी

दूर से ही एक नजर मे ही पहचान गया था। उस दिन उसने कोई हल्के हरे

कलर का स्वेटर पहन रखा था ।उसके साथ ही आज हमे ये भी पता

चला की ये कलर तो उस पर वहुत ही फबता है ।इसमे तो वो परी से भी

ज्यादा खूबसूरत दिखती है या फिर ये हो सकता है की ये सिर्फ मेरे

दिमाग की कल्पना हो क्यूंकी बो मेरा फेवरेट कलर था ।

खैर जो भी आज फिर मेरी नजरे कुछ देर के लिए उस पर रुक गयी। एक तो

मुझे पहले से कोई अंदाजा भी नहीं था। की बो मुझे दिख सकती है,

इसलिए थोड़ा वहुत आश्चर्यचकित भी था। अक्सर ये सभी के साथ

होता होगा…जब आपको अचानक से कुछ ऐसा नजर आ जाए ,

जिसको आप पहले से ही देखना चाह रहे हो तो धडकने कुछ देर के

लिए थम जाती है। पर बात ये भी है धड़कने सबकी नहीं रुकती होगी क्यूंकी

सब की धड़कने मेरी तरह नहीं होती….. बाबली ।

खैर जो भी हो उसने बो मुझे नहीं देख पायी। क्यूंकी उसकी ऊपर न देखने

की आदत जो है । पर इसमे भी शायद उसकी गलती नहीं है क्यूंकी जव वो

ऊपर देखती होगी आस-पास जो भी होते होंगे सभी की नजरे उस पर थम जाती

होंगी। अब तक वो जा चुकी थी पर आज मेरे दिमाग मे बहुत कुछ

आया । मैंने अपनी घड़ी मे समय देखा 04:50pm हो रहा था ।

मैंने मन ही मन सोचा अब तो इसके बारे मे सब कुछ पता करना ही

पड़ेगा। ………..मुझे तो नाम भी नहीं पता इस बला का …….. माफ

कीजिये … खूबसूरत बला का।

इतनी उधेड़-बुन मेरे दिमाग मे चल ही रही थी की तभी पीछे से आवाज

आई ,”भैया आगे नहीं बढ़ोगे क्या। या यही खड़े रहने का इरादा है । ”

मे अचानक से चौका ।क्यूंकी ये आवाज़ शादान की थी । मुझे तो लगा

जैसे मे कुछ पल के लिए सपनों मे चला गया था ।

मैंने हाँ मे अपना सर हिलाया । क्यूंकी मे काफी देर से एक ही जगह

पर रुक गया था । पर मशाल्लाह इतनी देर मे मेरा दिमाग मे काफी

कुछ चल गया था। मैंने आगे का पूरा प्लान फिक्स कर लिया था की

क्या करना है और कैसे करना है ?

 

”क्या सुनाऊँ मे अपनी कहानी ,

एक बेढंगी,बेसुरी,बेमतलबी मेरी मुहजवानी है ।

जो पता नहीं अपनी मंजिल तक पहुंचेगी या नहीं ,

ये वो मजधार की बहती हुयी, रवानी है। ।”

(मेरे हाथों से लिखी हुयी मेरी डायरी की मेरी खुद की लिखी पहली शायरी

………चाँद के लिए )to be continued

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.mishra’s lover

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raaj rathore
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