Thursday, December 14, 2017
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sl.num.031 यार छोड फिर कभी देखते है… mishra’s lover

Sl.num.31. Continue…

me, “…….dame sure…tell?”e
Rimpy , “Yes…yes…yes”
ऐसी कुछ ओर बातो पर हमारे बीच discussion हुआ,जब उस रोज हम दोनो सुबह टहल के वापस आ रहे थे|
आज ना जाने कहा से उसके दिमाग मे ये अटपटी सी बाते आ गयी थी| उपर से उसकी जिद थी कि मै उसकी इस अटपटी सी ख्वाहिश को अन्जाम दू|
दुसरी बात, वो ये सब मुझसे आज ही करवाना चाहता था मैने उसको मनाने की लाख कोशिश की,लेकिन वो कहाँ मानने वाला था, उसकी जुवान पर एक ही बात अटक के रह गयी थी,”this is the right time” .
उसने अपनी बात को सही साबित करने के लिये ढेर सारे explanation दे डाले|


उसे बिल्कुल भी पता नही था,मै इस सब के लिये ,अन्दर से बिल्कुल भी तैयार नही था| इस सब के लिये जो हिम्मत चाहिये थी, मेरे पास तो वैसी कोइ चीज ही नही थी|
अन्तत्: हम इस बात पर सहमत हुये कि मुझे बस बात करने के लिये एक कदम बढाना है| बाकि सब उसके ( mishraji) की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा| मेरी क्रियाये प्रतिक्रियाये भी उसी के अनुसार बदल जायेगी
फिर जैसा कि हमने सुबह प्लान किया था| उस दिन हम लाइब्रेरी थोडी देरी से पहुन्चे| mishra & group का काँलेज मे उपस्थित होने का confirmation मैने साइकिल स्टेन्ड से ही ले लिया| अभी लाइब्रेरी मै बैठने के लिये हमारे पास sufficient time था,उसी बीच हमने पढने की नाकाम कोशिश की| मुझे नही पता उस वक्त रिम्पी पढा या नही पर हाँ …..मै सिर्फ किताबो से झूज रहा था| उस वक्त मेरा पढना लिखना सब व्यर्थ था| ये समय ही ऐसा हुआ करता था,जब दिमाग काम करना बन्द कर देता था|
उस दिन लाइब्रेरी मे भी थोडी भाड्. ज्यादा थी| देखने से प्रतीत हो रहा था, पढने लिखने वाले लोग तो कम ही थे,समय व्यतीत करने वाले व वहाँ बैठकर लम्बी लम्बी हाँकने वाले लोग ज्यादा भीद बढा रहे थे| library मे ही उपस्थित लोगो मे से दो लडके उठे ओर हमारे सामने आकर बैठ गये| मै उन दोनो मे से किसी को नही जानता था|
दर असल वो दोनो लडके रिम्पी को जानते थे,फिर जब मेरी थोडी वहुत जान पह्चान हुयी ,तब रिम्पी ने बताया कि ये 12th तक मेरे साथ पढे है| मैने भी उन्हे एक अपना सामान्य परिचय दिया| थोडी बातचीत ओर बढी तो उन्होने बताया कि बो भी इसी कोलेज मे पढते है व उनकी bsc.(maths) second year है| इस प्रकार वो दोनो भी मुझसे जूनियर थे|
मेरे साथ तो उनकी कोइ खास बात चीत नही हुयी,लेकिन मै उनकी बातचीत व तौर तरीको से थोडा सा भाँप गया| दोनो ही मध्यम दर्जे के व्यक्तित्व वाले लोग थे| दोनो मे विपरीत प्रकार वाले फर्क थे, दोनो मे से एक ज्यादा बोलने मे माहिर था,तो दुसरा थोडा शान्त स्वभाव का व्यक्ति था| उनमे से जो शान्त स्वभाव वाला था,वो शारीरिक बनावट से मजबूत व दुसरा उतना ही शारीरिक रूप से कमजोर था| शायद उसने अपनी सारी शारीरिक उर्जा बोलने मे ही खत्म कर दी थी| इसलिये शायद शरीर को मजबूत बनाने के लिये उर्जा बचा ही नही पाया| hahahaha…
जब उन लोगो की बातचीत को लगभग 20 मिनट से ज्यादा हो गये,मैने अपनी आँखो से रिम्पी को discussion बन्द करने के लिये इशारा किया| दरअसल मे उसे अवगत कराना चाहता था कि ,”mishra & group की क्लास खत्म होने वाली होगी इसलिये अब इस discussion को पुणत्: विराम दे दे.”
रिम्पी को भी मेरे इशारे को समझते देर ना लगी,फिर उसने बडी ही चालाकी से discussion को खत्म किया ही ,साथ ही साथ उन लोगो को विदाई भी दे दी|
थोडी देर के अन्तराल के बाद मिश्रा जी का क्लास भी छूट गया| इसके साथ ही एकाएक मेरे शरीर मे खून की रप्तार दौगुनी हो गयी| जैसे ही एक एक करके लोग क्लास से बाहर आने लगे ,मेरे दिल के धडकने की रफ्तार भी बढने लगी|
इधर रिम्पी को बहुत जल्दी हो रही थी| उसने मुझे किताबे समेटने को कहा| मैने जानबूझ कर उसकी बात को अनसुना किया| मुझे अच्छी तरह से पता था कि मै अन्दर से पूरा डरा हुआ हु| मेरे अन्दर निहित आत्म विश्वास की प्रतिशतता सेकेन्ड की दर से घटती जा रही थी| हद तो उस वक्त हो गयी|जब मिश्रा & ग्रुप निकल कर क्लास के दरवाजे पर पहुन्चे मेरे अन्दर कूट कूट कर भरे आत्म विश्वास की एकदम से वाट लग गयी| अव मेरी दिल की धडकनो का आलम कुछ यू हो चला था कि जैसे हर एक pumping process के साथ मानो कोइ छाती पर हथोडे से वार कर रहा हो,फिर जैसे ही मिश्रा & ग्रुप बाहर की ओर चल दिये | रिम्पी ने मुझे एक बार फिर से poke किया,वो बोला,” भाई किताबे समेत ओर चल आजा मेरे साथ |”


अब उसकी बातो को अनसुना करना जायज ना था,लेकिन अब तक ” डर” मेरी रगो मे खून बन कर दौडने लगा था| इसलिये मैने उससे हल्के स्वर मे कहा,” यार छोड फिर कभी देखते है|”to be continued…
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.mishra’s lover

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raaj rathore
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