Thursday, December 14, 2017
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sl.num.038 वो मेरे लिए मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी

sl.num.38……..

उसी रात लगभग 2 बजे जब मे train के लिए निकल रहा था ,मम्मी ने मुझे कुछ पैसे दिये ,कहा कि तेरे खर्चे के लिए हो जायेंगे ,लेकिन मैंने हसते हुये
लेने से मना कर दिया। मम्मी को भी पता था कि में नही लूँगा ,फिर भी उन्होने अपना फर्ज निभाया ,वो अच्छी तरह जानती थी कि मे किसी पर
dependent नहीं रहना चाहता था । इसी सब के चलते मैंने अपनी पढ़ाई व खुद के खर्चे के लिए भी 11th class के बाद मम्मी,पापा से पैसे
लेने बंद कर दिये थे। home tutions,batches,schools आदि मे पढ़ा कर, में अपना बोझ खुद उठा लिया करता था । वहुत ही rare case
मे फीस के भी पैसे घर से मांगा करता था
मैंने कही mention नही किया पर कुछ दिन तक मिश्राजी के पापा के साथ भी मेरा थोड़ा वहुत उठना-बैठना रहा। उसी बीच उन्हे पता भी
चला था कि में self study के साथ-साथ टीचिंग भी करता हु। तो उन्होने मुझे एक tution का भी offer दिया था । पहले मुझे लगा कि वो
अपने किसी खास के लिए पूछ रहे है,पर असल मे वो किसी और कि मदद कर रहे थे ,फिर जब मैंने अपनी फीस बताई ,तो उन्होने थर्ड पार्टी से
बात की ,पर third पार्टी ने कुछ concession मांगा । मैंने मिश्राजी जी के पापा से कहलवा दिया ,”में teaching quality मे compromise
नही करता इसलिए concession मिलना मुश्किल है ” अंततः हमारी बात नही जमी।


मम्मी के पैसे मैंने ये कहकर रख लिए कि में इन्हे वापस आकर लौटा दूंगा । मेरे पास मेरे खर्चे के लिए पर्याप्त पैसे थे ,जिनमे भैया के दिये हुये पैसे
,नकद व वाकी के मैंने atm के रूप मे मैंने अपने पास रखे हुये थे । फिर जब में घर से निकालने वाला था ,मम्मी का चेहरा देखने लायक था । उनके
लिए तो में घर मे सबसे छोटा था ,मुझे इतना दूर जाते हुये देख वो काफी डरी हुयी थी। माँ तो माँ होती है ……….उनकी आंखो मे जो पानी उभर के
आया था,मुझसे छुपा नही था । अगर मैंने जाने कि जिद न की होती तो वो मुझे जाने ही नही देती। इससे पहले में घर से निकलता मम्मी ने कहा ,”जाओ
भगवान के पैर छु लो उनका आशीर्वाद तुम्हारे साथ रहेगा। ”
मैंने भी थोड़ा भावुक होकर कह दिया ,”मैंने आप लोगो के पैर छू लिए ना अब मुझे कही पैर छूने कि जरूरत नही है । ”
” बाते करवा लो बस इस लड़के से ”,मम्मी बोली
सही समय पर जाकर में train पर चढ गया। अब मुझे अगले पूरे दिन सोना था , दूसरी सुबह जो होगी कलकत्ता मे होगी । हमेशा की तरह वो कॉपी
में अपने साथ ही ले गया। जिसमे में रोज मर्रा की बाते लिखा करता था । वेसे तो वो एक साधारण कॉपी ही थी पर मिश्राजी के बारे मे लिखे हुये शब्दो से
उसमे नूर आ गया था । दरअसल वो कॉपी मेरे लिए खजाना थी , जिसकी कीमत मेरे लिए दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी । एक तो वो मेरे लिए मेरी
सबसे अच्छी दोस्त थी इसलिए में अपने दिल की हर एक बात उससे साझा करता था और वो हर बार उतने ही चाव से मेरे बेमतलबी बातो को सुना
करती थी। जब में उससे बाते साझा करता था तो मेरे मन से काफी बोझ हल्का हो जाया करता था ऐसा लगता था मानो किसी ने घावो पर मरहम लगा
दिया हो । यही बजह थी कि वो copy हमेशा मेरे पास मेरे साथ रहा करती थी ।
ट्रेन अपने हिसाब से चले ही जा रही थी । दोपहर को जब में सोकर के उठा तो हल्का – फुल्का पेट भरने के बाद जब में फ्री हुआ तो मैंने सोचा कि
रिमपी को कॉल कर लिया जाये। क्यूंकी अब तक वो exam दे चुका होगा तो रिज़ल्ट आने वाला होगा । पता भी चल जाएगा कि वो select हुया
या नही । ट्रेन रफ्तार मे थी शायद इसीलिए network नही मिल पाये , फिर में किसी station आने का इंतजार करने लगा ।
एक station पर जब train थोड़ी देर के लिए रुकी तो मैंने रिम्पी को कॉल किया। इस बार उसने call attend किया
”hello, कैसा है ,तेरा exam हो गया । ”,मैंने कहा
”हा हो गया ”,उधर से जबाब आया
”पास हो गया”,मैंने पूछा
”हा हो गया ”,फिर उधर से जबाब आया
”सच्ची ”
”हा यार सच्ची ”
”अरे वाह ! बढ़िया है तूने तो कमाल कर दिया ”मैंने खुश होकर कहा
”तेरा क्या हुआ ” ,उसने पूछा
”भाई, में पहले पहुँच तो जाऊ ,अभी में train मे हु”,
”परेशान मत हो सब अच्छा ही होगा”,उसने दोस्ती का फर्ज निभाया
”हाँ वो तो है ”, मैंने जबाब दिया
”चल बाद मे बात करता हु अभी और भी एंगेजमेंट है ”, रिम्पी बोला
”ठीक है भाई ,मेरे भी ट्रेन चलाने वाली है । चल बाय ”मैंने शब्दो से उससे विदा ली
फोन काटने के बाद अब मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे कंधो पर बोझ और बढ़ गया है सोच रहा था दोस्त का हो गया है पता नही मेरा exam
clear होगा या नही । performance ठीक दे पाऊँगा या नही । पेपर पता नही कैसा आयेगा । ऐसे ढेर सारे सवाल मेरे दिमाग मे उमड़ रहे थे।
to be continued.
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. mishra’s lover

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raaj rathore
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