Thursday, December 14, 2017
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Sl.num.17(1) अभी कही खो जाएगी ,फिर ढूंढते रहना. Mishra’s lover

sl.num.17(1)       27feb2012(monday)

कॉलेज से लौटते वक्त रास्ते मे मैंने रिम्पी से कहा की वो शाम को फ्री रहे,उससे मुझे थोड़ा-वहुत कुछ काम है ।

पर मुझे उससे काम क्या है ये मैंने उसको नहीं बताया । मैंने बस इतना कहा की, ”मे दोनों बैच पढाने के बाद

उसको लेने आऊँगा”

शाम को ठीक समय पर मे उसको लेने पहुँच गया । उसने एक बार फिर पूछा की हम कहा जा रहे है ,पर मैंने

उसकी बात को अनसुना कर दिया और बात को घूमाते हुए कहा ,” तुझे खुद पता चल जाएगा जब तेरी जरूरत

होगी” उसने भी बात को दिल पर न लेते हुये कहा,”okk boss”

वो ट्यूसन गयी या नहीं ये मैंने पहले से ही पता कर रखा था।हम दोनों घूमते-घामते मेरी तय की हुयी जगह पर

पहुँच गए । पथवारी मंदिर के पास मे एक और भी मंदिर है जिसका नाम मेरी जानकारी के हिसाब से ”बगिया

वाला मंदिर” है । इस मंदिर मे बैठने के लिए अच्छी ख़ासी जगह भी है। समय तो पहले से ही पाँच से ऊपर का

हो चुका था । इसलिए पहले तो हमने मंदिर मे माथा-टेका,वो भी जरूरी था क्यूंकी वरना भगवान जी बुरा मान

सकते थे ।उस वख्त ये काम भी उतना ही जरूरी था जितना कि” मीठा खाना जरूरी होता है कुछ भी अच्छा

करने से पहले।”

बातों ही बातों मे मैंने रिम्पी को इतना तो बता दिया की हम यहाँ किसी के आने का इंतजार कर रहे है ।

लेकिन मुझे यकीन ही नहीं पूरा विश्वास था ,।आगे पीछे का रिम्पी को कुछ भी याद नहीं होगा

अभी 6 बजे का समय हो चला था । हमारी बकवास अभी तक चालू थी ,बस यही तो हा हमारे पास

जिसकी बजह से बो एक घंटा भी हुमे बिलकुल पता ही नहीं चला कब गुजर गया ।अभी मेरे कहने से ,हम

दोनों मंदिर की बाहर वाली दीवार पार बैठ गए । ताकि जब भी चाँद वहाँ से गुजरे तो हुमे पता चल जाये। हुमे

नहीं सिर्फ मुझे पता चल जाये ,रिम्पी उसको पहचान ले यही वहुत बड़ी बात है।कुछ मिनट्स और गुजरे फिर

उसके बाद मैंने देखा । पथवारी मंदिर की तरफ से वो आ रही थी ।

मैंने उसको कोने पर ही देख लिया था ,फिर भी मैंने उसको अनदेखा किया ।क्यूंकी उसकी नजर

अभी तक मुझ पर नहीं पड़ी थी । उसे हमारे एकदम सामने से ही गुजरना था तो वो लगातार हमारी

तरफ बड़ी आ रही थी । और इधर जो मैंने सोचा था वही हुआ ।सच मे रिम्पी उसको देखने के बाद भी नहीं

पहचान पाया था की कभी मैंने उसको कुछ भी बताया था । रिम्पी अभी तक मेरे साथ वार्तालाप किए जा रहा

था जो की हम पहले से ही कर रहे थे । हालांकि मैंने उसकी बात सुनना और कुछ भी कहना बंद कर दिया था।

उसके बाद मैंने ध्यान दिया तो पाया । की जब वो(चाँद) मेरे एकदम सामने से गुजरी तो बो कुछ बोलते-बोलते

एकाएक शांत हो गयी थी ।

इसका मतलब उसने भी मुझे पहले से ही देख लिया था । मे उसे अनदेखा करने की कोशिश कर रह

था और वो मुझे अनदेखा करने की कोशिश कर रही थी । जब वो हमे क्रॉस कर के निकल गयी तो फिर से

उनकी बाते शुरू हो गयी । अब जब वो निकल ही गयी थी तो मैंने रिम्पी से कहा ,”अब चले”

वो एकदम से आश्चर्यचकित होकर बोला,” क्यू यहाँ पर अब नहीं रुकना । ”

मेरे एक धीरे से थप्पड़ उसके सर के पीछे वाले हिस्से पर मारते हुये बोला ,”मैंने कहा उधर देख जिस लिए हम

यहाँ बैठे थे वो लोग निकल गए। ”

रिम्पी,”ये लोग कौन थे ?”

मुझे बिलकुल भी अलग सा महसूस नहीं हुआ । क्यूंकी मे उसकी आदत से अच्छी तरह वाकिव था ।

मैंने दीवार से कूदते हुये कहा,”बताता हु पहले तू नीचे उतर”

मैंने साइकल संभाली और उसको बैठने का इशारा किया ।

थोड़ी ही देर मे हम उनके पीछे ही चल रह थे ।

मे ,बो दोनों आपस मे क्या बाते कर रही थी ,सुनने की कोशिस कर रहा था । पर हर बार की तरह मुझे सिर्फ

उसकी आवाज की आहत ही सुनाई दे रही थी ।

चलते -चलते ही मैंने रिम्पी को एक बार फिर से याद दिलाया,”याद कर एक बार जब हम दोनों कॉलेज

से लौट रहे थे तो मैंने रास्ते मे कुछ बताया भी था और दिखाया भी था । ”

उसने भी जब अपनी यदास्त पर जब थोड़ा ज़ोर डाला तो उसे सब कुछ याद आ गया। वेसे उसका

भूलना भी जायज था क्यूंकी इस्स बात को लगभग छः महीने हो चुके थे ,पर सबसे अच्छी बात तो ये थी की

उसे अभी फिर से याद आ गया था ।

जैसे ही उसे मेरी वो बात याद आयी। बो झटक के मुझसे बोला,”पक्का ये वही है ,और अगर वही है तो तू अभी

तक इसी पर रुका हुआ है । ”

थोड़ा सा अजीब लगा मुझे उसकी ये बात सुन कर ,”हाँ यार वही है और इसमे इतनी चौकने वाली क्या बात है ”

मैंने अपनी बात को बिना काटते हुये कहा ,” अभी जो मे बोलूँगा तू बस उस पर ध्यान देना ,….अभी तेरा

काम शुरू होने वाला है । ”

चूंकि वो साइकल के पीछे बैठा हुआ था इसलिए मुझे नहीं पता अभी वो कैसी रिएक्शन दे रहा था पर वो

एकदम बोला ,”ऐसा क्या कराने वाला है मुझसे । ”

में,”चल जाएगा पता,मरा क्यू जा रहा है ”

कुछ देर बाद उसकी सहेली उससे अलग होकर अपने घर के लिए सीधी चली गयी । अभी

चाँद अकेली बची थी ,तो वो बायीं तरफ एक गली मे मुड़ी। उसके पीछे -पीछे मैंने भी अपनी साइकल बायीं

तरफ घूमा ली। और इशारे से रिम्पी को चुप चाप बैठने के लिए कहा। अभी थोड़ा दूर ही हम और उनके

पीछे चले ही थे की वो फिर से बायीं तरफ मुड़ने लगी ।

अभी मैंने साइकल रोकी ,बिना एक सेकंड का इंतजार किये रिम्पी को उतरने के लिए बोला ।

जैसे ही वो जमीन पर खड़ा हुआ ।

मैंने उससे कहा ,”ओए गली ज्यादा अच्छी नहीं है मे साइकल के साथ यही रुकता हुआ ,और तू पैदल

इसके पीछे जा और इसका आवास (घर) देख कर आ ।”

रिम्पी सकपकाया और बोला ,”अबे मे क्यू जाऊँ तू जा न साइकल के साथ । ”

मे जल्दी से बोला ,”अबे यार साइकल से सही नहीं रहेगा,यहीं कहीं आस -पास ही इसका घर है । ”

वो फिर बोला ,” यार तू ही जा ”

मैंने अपनी बात मे ज़ोर दिया ,”अबे यार इसीलिए तो लाया था मे तुझे। ”

मैंने फिर कहा ,”यार वहस करने के लिए अपने पास समय नहीं है ,वो देख कितनी आगे निकल गयी ।

अभी कही खो जाएगी ,फिर ढूंढते रहनाs ।”

to be continued

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.mishra’s lover

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