Thursday, December 14, 2017
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Sl.num.18(1) the end. Mishra’s lover

sl.num.18(1) ”THE END” (29 feb2012)

पिछले दो दिन मे रिमपी मुझसे एक ही सवाल कई बार कर चुका था ।
” तू एक ही लड़की पर ही रुक कर क्यू रह गया है ,और क्यू इतना समय बर्बाद कर रहा है ”
और मैंने कोई जबाब नहीं दिया । क्यूंकी मेरे पास न तो कोई बजह थी और ना हीं कोई जबाब
शायद मुझे खुद भी नहीं पता था । बस मेरा दिल किए जा रहा था और मे उसे follow
किए जा रहा था ।मे गलत भी हो सकता हु पर न जाने क्यू मे इस्स बात को मनाने को तैयार नहीं था ।
क्यूंकी मेरे पास इस्स बात की भी कोई बजह नहीं थी।
आज सुबह जब ट्यूसन से बापस आ रहा था ,रिमपी भी मेरे साथ ही था। वही हमेशा की तरह हम
दोनों बाबले किसी गहन चर्चा मे लगे हुये थे ,तभी मिश्रा जी और कोई एक लड़की ,जो की उनके
साथ रोज ही रहती थी ,सामने से आते हुये दिखे । हमने आज़ाद पेंटर वाली गली पार ही की थी
और बो लोग,शिकोहाबाद की सबसे मशहूर टिक्की के ठेले वाली जगह के ठीक सामने ही थे ।
उन लोगो को मुझ से पहले रिमपी ने देखा था
पीछे से मुझसे बोला,”ओए ओए ओये सामने देख”
जब मैंने देखा ,” उनके साथ वाली लड़की ने उन्हे कुछ इशारा किया ”
हम दोनों चौंक गए । मैंने धीरे से रिमपी से इशारा करते हुये कहा ,”तूने देखा जो अभी हुआ ”
उसका जबाब हाँ मे आया ।
इस गुप्तगु मे बो हुमे और हम उन्हे already क्रॉस कर चुके थे । लगभग 2 सेकंड बाद
रिमपी बोला ,”यार ये लोग तो रुक गए”
मैंने जब पीछे देखा ,”तो पता चला शायद उसकी फ्रेंड की साइकल मे कुछ problem आ गयी थी ,
इसलिए बो रोड क्रॉस करके साइकल की दुकान पर खड़ी थी । और मिश्राजी इसी तरफ ,लेकिन
तहसील तिराहे की तरफ मुह करके खड़े हुये थे ।
हमारी साइकल लगातार आगे बढ़ती जा रही थी। लेकिन तुरत मैंने एक नया निर्णय लिया और
साइकल को बिशुद्ध जैन बूक स्टोर पर रोक दी। उस समय साइकल का पायलट मे ही
था तो स्पाष्टह साइकल मेरे इशारे पर ही चलनी थी ।साइकल के अचानक रुकने के साथ ही
रिमपी बोला,”अब क्या हो गया ”
मैंने कहा ,”पिछले दो दिन से तू बार बार एक ही सवाल पूछे जा रहा है, अब उन सवालों के
तुझको जबाब देता हूँ ।”
बो बोला ,”बो तो तू चलते चलते भी दे सकता था । ”
मैंने कहा ,”शायद उतनी अच्छी तरह से नहीं दे पाता । ”
रिमपी जबाब सुनने को तैयार था ।
मैंने साइकल स्टैंड पर लगाई । रिमपी को लेकर खुले एरिया की तरफ रोड के किनारे तहसील
की तरफ मुह करके खड़ा हो गया।
मैंने रिमपी से कहा ,”ले आज मे सब कुछ यही खतम कर देता हु means ”the end ”
देख बो वहाँ उस तरफ मुह करके खड़ी है और हम यहाँ है ये बात उसे भी पता है । हम यहाँ पर
कुछ पल के लिए खड़े होते है । और मे वायदा करता हु , अगर आज और अभी उसने पलट कर
नहीं देखा …..भाई तेरी कसम…. on spot ”the end””
रिमपी बोला ,”ऐसा है क्या ,,तू कुछ ज्यादा आत्मविश्वासी नहीं हो रहा है । ”
मैंने कहा ,”शायद ,हो सकता है ”
रिमपी ने मौके की नजाकत को समझा और फायदा उठाते हुये बोला ,”चल एक शर्त मे भी रखता हु ”
मैंने चौंकते हुये पूछा ,” kyaaaaaaaaaaaaa”
बो वोला ,”समय limited ही रहेगा ,सिर्फ 10 तक गिनने तक अगर ऐसा होता है तो ही
मे मानूँगा वरना नहीं मानूँगा ।
मेरे पास भी कोई और चारा नहीं था और वेसे भी मुझे भी तो उसकी कोई न कोई बात माननी पड़ेगी ।
आखिर रिस्ता उसके साथ भी मेरा दोस्ती का है और कभी कभार रिस्तों को निभाने के लिए चीजे
favour मे लानी पड़ती है ।
मैंने ,रिमपी से हाँ बोल दिया ।
उसके बाद बिना कोई देरी किए गिनने का सिलसिला जारी हुआ ।
1…..
…..2
……….3
……….4
……….5
हम इधर से उधर मुह करके खड़े हुये थे। पर उधर से अभी तक कोई response नहीं था ।
वो एकदम सीधी खड़ी हुयी थी। यहाँ तक की वो 90 डिग्री यानि की साइकल की दुकान की
तरफ भी नहीं देख रही थी फिर हमारी तरफ 180 डिग्री की तरफ देखने का कोई सवाल ही
पैदा नहीं होता । मैंने महसूस किया जल्दी मे मैंने गलत निर्णय ले लिया था ।
जैसे की मैंने सच मे ”the end”
की ठान ली हो ।
रिमपी ने एक और नंबर बोला ,”………6
और फिर एक और ………..7
पर इस्स बार मैंने महसूस किया ,जैसे की रिमपी ने नंबर बोलने के बीच का gap बढ़ा दिया था।
मानो की शायद अव बो खुद हारना चाह रहा हो ।
थोड़ा और gap बढ़ाने के बाद उसने अगला number बोला…………8
अबकी बार उसकी आवाज से ताजगी गायब हो चुकी थी । जबकी वो जीत से सिर्फ दो कदम दूर रह गया था ।
अब एक गहरी सांस के बाद उसने अगला नंबर भी बोल दिया । ………….9
वो एक बार हिली भी नहीं ।शायद मे हार चुका था । मैं साइकल की तरफ बढ़ा । handle पकड़ते
हुये बोला ।to be continued.
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……. mishra’s lover

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raaj rathore
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