Thursday, December 14, 2017
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Sl.num.18(2). बेरोजगारी. Mishra’s lover

sl.num.18(2) subtitle-बेरोजगारी

मैं साइकल की तरफ बढ़ा । handle पकड़ते
हुये बोला । भाई आखिरी भी बोल दे । मान लिया मैंने ,भाई तू जीत गया।
इसी के साथ उसने
आखिरी नंबर भी बोल दिया ।………………. 9 and1/2
खैर काफी धीरे से बोला था ।
मुझे नहीं पता उसके मन मे क्या चलने लगा था।
तभी कुछ वो चिल्लाकर वोला ।
ओये ,,,,, पीछे देख …..पीछे देख …..पीछे देख ……पीछे देख ….. अबे पलट गयी । पलट गयी ।
जब मैंने पीछे देखा वो उसी बखत एकदम से बस कुछ पल के लिए मुड़ी थी हुमे तो उसी पल का
इंतजार था ,पर शायद
उसकी निगाहें किसी को ढूंढ रही थी । मुझे नहीं पता था वो कौन था ।
फिर वो एकदम चिल्लाकर वोला अब हुआ ……………10(ten) ।
एक जोरदार थप्पड़ मेरे पीठ पर मारते हुये बोला ……..कमीने तु जीत गया , और मे हार गया ।
वेसे असलियत मे हुआ तो यही था ,,,पर न जाने क्यू हार कर भी जीत गया था ।
मे रिमपी से बोला ”लेकिन अगर मे इसको ऐसे बोलू की तू हार गया तो चलेगा । ”
या चलेगा जरूर चलेगा ……….( पता नही क्यू हारने के बाद भी उसके चेहरे पर
मुझे जीतने की खुशी दिखाई दे रही थी । ये कमीने सारे दोस्त ऐसे ही होते है ।
अपने गम का मातम हो न हो …. दोस्त की खुशी का जशन जरूर होना चाहिए )
मैंने उधर देखा मिश्रा जी जाने वाले थे लेकिन जाने से पहले एक look और देके गयी ।
उसके बाद हम भी अपने घर की और बढ़ चले।
ले तू एक बार के लिए मर रहा था वो दो बार पलट कर गयी है ।
मैंने भी कहा ,”सही बात है पर समझ नहीं आ रहा तू जीता या मे ”
रिमपी बोला ,”वो छोड़ ये बता तो जैसे की मे हार गया हु ,तो मेरे लिए क्या हुकम है….मेरे आका”
उसके इस मजाकिए अंदाज को देखकर मे भी अपनी आवाज़ मे शाहीपन लाते हु
बोला ,”देख फिलहाल तो कोई हुकम न है । पर मुझे ऐसा लगता
है की ये लड़की मेरी अच्छी दोस्त बन सकती है,हो न हो उसे भी यही लगता होगा। तो जब भी मुझे
तेरी जरूरत पड़े बस हाजिर हो जाया करना । बताओ कर पाओगे ।
उसने सर हिलाते हुये लड़कियों के अंदाज मे जबाब दिया,”hmmmmmm”
लेकिन फिर एक सवाल भी पूछा ,”अच्छा तुझे ऐसा क्यू लगता है ,और तूने इसमे ऐसा क्या देख लिया।
यार वहुत कुछ देखा ,तू खुद देख ले ….
सीधी है
स्वीट है
कितना कम बोलती है
and over all आज कल के हिसाब से कितनी
सिम्पल है।
रिमपी थोड़ा सा सोचने के बाद बोला सुन ,”अगर सीधी न हो ,
स्वीट भी न हो ,
बोलने की अक्ल ही न हो या फिर झूठ बोलने मे माहिर हो ,
and over all सिंप्लिसिटी का सिर्फ दिखावा करती हो ,ये भी तो
हो सकता है मतलब दिखती कुछ और है और असल मे कुछ और हो ।”
मैंने कहा ,”यार तू उसके बारे मे ऐसा क्यू सोच रहा है । सिर्फ positive सोच ना यार….”
बो बोला,” देख भाई मे तुझे सच बताने की कोशिश कर रहा हु। उसके अलावा हम किसी को किस
नजर से देखते है ये हम पर निर्भर करता है ,तू अभी उसको अच्छी नजरो से देख रहा है इसलिए
तुझे बो अच्छी दिख रही है इसीलिए तुझे अभी उसकी बुराइयाँ नजर भी नहीं आएंगी । चाहे
तू कितनी भी कोशिश कर ले । ”(इतना सब कुछ वो एक ही सांस मे बोल गया )
मे भी अपनी बात को रखते हुये बोला ,” ठीक है न यार बाद का बाद मे देखते है और वेसे
भी तुम सब ,मेरे साथ हो न तो all is well.
शायद फिर रिमपी ने और कुछ बोल्न मुनासिब न समझा और एक छोटी सी स्माइल के साथ शांत हो गया ।
वेसे भी तब तक हमारा घर आ चुका था।
जिंदगी मे मेरे लिए ये दिन इसलिए और importance रखता है क्यूंकी इस्स दिन मैंने अपनी
जिंदगी मे पहली बार कोई competition परीक्षा पास किया था ,और वो IBPS
COMBINED BANK CLERK EXAM था ,लेकिन अभी सिर्फ लिखित परीक्षा
क्लियर हुआ था साक्षात्कार तो बाकी था फिर भी मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
मैंने अपने पूरे घर को खुशी के मारे सर पर उठा रखा था । आज के इस्स competition
भरे दौर मे एक छोटी सी सरकारी नौकरी पाने के लिए भी न जाने नौजवानो को कितने
पहाड़ पलटने होते है । और इसी के चलते बेरोजगारी की समस्या हमारे देश मे एक बड़ी समस्या
बन चुकी है । हमने जो economic reforms किए है उन्होने भले ही
industrial productivity को बढ़ावा दिया है और हमारे capital
intensive area मे विदेशी मुद्रा का भी आगमन हुआ है पर फिर भी हम नौकरियाँ
पैदा करने मे असमर्थ रहे है ।भारत की जो मजदूर फौज है उसकी जो बढ़ौत्रि होती है एक साल मे
उससे काफी कम बढ़ौत्रि कारोबार में होती है ।इसीलिए हमारा देश इस्स समस्या का सामना कर रहा है ।
देश की लगभग 60% काम करने वाली फौज आत्म सेवक है जिनमे से कुछ तो वहुत गरीब रहते है । और
लगभग 30% casual worker है जो सिर्फ तब काम करते है जब उन्हे काम मिलता है वाकी
दिन के लिए वो विना काम के रहते है । और जिनको काम मिलता है तो काम की तंख्वाह इतनी कम
होती है जिससे उनका रोज का गुजारा करना भी वहुत मुसकिल होता है ।
बेरोजगारी ढेर सारी बुराइयों की जननी है ,ये वो जहर है जो हमारे समाज को गंदा करती है और उसके
अस्तित्व को भी खतरे मे डालती है । हम किसी व्यक्ति से ईमानदारी ,सत्य और अहिंसा की कामना
कैसे कर सकता है जो अपने परिवार के लिए दो वख्त की रोटी का इंतजाम नहीं कर प रहा हो ।जो संभाल
लेते है अपने आप को वो बच जाते है और जो डगमगा जाते है वो गलत रास्ते पर निकल पड़ते है।
इसीलिए बेरोजगारी हमारे देश मे वहुत ही जटिल,सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक विषय वन चुकी है ।
इसे जड़ से खत्म करने के लिए अस्थिर निवारण काम नहीं करने वाले है ।इसको बदलने के लिए हुमे अपने
education सिस्टम की overhauling की अति आवश्यकता है । जिससे हम पढ़ाई खतम
करने के बाद नौकरी धूधने वाले खतम कर सके ,और उसकी जगह पर हम पैदा कर सके ऐसे विध्यार्थी
जो खुद के ventures शुरू कर सके । इसके लिए हुमे अपने स्कूल्स,colleges मे vocational
ट्रेनिंग की भी आवश्यकता है education system और vocational training मे
जब तक coardination नहीं बैठा पाये ये एक बड़ी समस्या ही रहेगी ।बेरोजगारी की समस्या को हुमे
एक युद्ध की तरह सामना करने की जरूरत है ,वरना ये समस्या हमारे देश को अंधेरे मे ले जा रही है ।इस्
समस्या को पैदा करने मे और भी कई बड़े reason है
जिनको खतम करने के लिए हुमे कड़े कदम उठाने होंगे । to be continued
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… mishra’s lover

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raaj rathore
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