Thursday, December 14, 2017
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Sl.num.20(2/2) more than three times i shouted her name mishra’s lover

sl.num20(2) “got her name”

वो मेरी मन्जिल तो नही थी,पर फिर भी ना जाने क्यु उससे मिलने के बाद मेरे पैर थम से जाते थे
कुछ ही दिन मे हमारे पेपर समाप्ति कि कगार पर पहुन्च गये. अब मेरे पास पहले से ज्यादा समय था. इसलिये जहाँ चाहु बडे ही आसानी से समय का उपयोग कर सकता था.शायद इसीलिये मैने खुद का पूरी तरह से साथ पकडा ,ओर जुट गया हर वो चीज पता करने मे जिसे मे हासिल कर सकता था. जिसमे सामिल था जैसे कि–
उसके पते से लेकर नाम तक ,
उसके फेमिली मेम्बर से लेकर उनके नाम तक , कौन कहा है,क्या करता है.
ओर इसके लिये रात-रात भर मैने इन्टरनेट भी सर्फ किया.
यहाँ मैने अपनी सारी की सारी तर्क शक्ती का इस्तेमाल किया.
हलान्कि ,मे इन सब के बावजूद तैयारीे कम्प्टीशन की कर रहा था,पर उसका फायदा मे इधर के सवाल हल करने मे लगा रहा था.
यहान तक तो फिर भी ठीक ठाक ही था.
उसके बाद हद तो तब हो गयी,
मैने अपने एक दोस्त की मदद से एक ऐसी किताब की जुगाड की जिसमे शिकोहाबाद के हर लेन्डलाइन का नम्बर था.
स्पष्ट्ः उसके घर का भी नम्बर था.
मैने सबकुछ नोट करके अपने पास रख लिया.उसके अलावा कुछ ओर नम्बर ओर बाकी चीजे भी पता की ओर उन्हे सन्वार के अपने पास रख लिया.
इतना सब कुछ करने के बाद भी मुझे नही पता, आखिर मुझे क्या मिलता था,
पर फिर भी ना जाने क्यु एक ललक सी रहती थी हमेशा कुछ ओर ज्याद जानने की,ओर उसके बाद मे उसी रिदम मे लग जाता.ओर हर वो तरिका अपनाता था जो की सम्भव हो सकता था.
इन सब के परे एक बात जो सबसे हट के थी .
यही सब करते हुये धीरे-धीरे मैने एक लम्बा सा रास्ता बनाया जो की उसके नाम तक पहुन्च गया.
उसके लिये ,उसके कोलेज की साइट पर जाकर पूरे कोलेज की हर एक विध्यार्थी का पूरा का पुरा बायोडाटा भी निकलना पडा , जो की मैने किया.
इसकी एक बजह कही ना कही ये भी थी ,ये छुट्टियो के दिन थे , ओर. मुझे कुछ ना कुछ करना ही था.
मम्मी कहती थी एक कहावत है,
“खाली दिमाग ,शैतान का घर्”
उन दिनो यही सब कुछ हमारे साथ चल रहा था .
हां तो जब मैने सारा का सारा डाटा इकट्ठा कर लिया .
उसके बाद मेरे सामने कुछ नाम आये जिनमे से अब मुझे उसका नाम चुनना था.
जो कि वहुत जटिल था, उसका नाम जटिल नही था, नाम को पता करना कठिन था. उसके,अलावा कोइ ऐसा रास्ता तो था नही कि सीधे से पता चल जाये,सिर्फ गुना – भाग करके हि पता कर सकता था.
अब मुझे अपनी सारी की सारी तर्क शक्ती लगानी थी. ताकी मेरी गणना कही गलत ना हो जाये.
सारे डाटा को जब मैने आपस मे हिलाया – डुलाया, जोडा-घटाया,गुनाकार किया, भागाकार किया.
तब जाके थोडा सा समस्या का समाधान मिला.
ओर समाधान कुछ युँ था… मैने जो ढेर सारे नाम इकठ्ठे किये थे थोडे से गुना भाग से उनकी सँख्या काफी कम रह गयी,
लेकिन अभी तक इतनी भी कम नही थी की मे किसी एक नाम तक पहुन्च पाता .
हालान्की बचे हुये सारे के सारे नाम कुछ युँ थे जो कही ना कही उसके टाइटल के साथ जुडे थे या कोइ न कोइ सम्बन्ध स्थापित कर रहे थे.
लेकिन सारे के सारे तो उसके नाम नही हो सकते थे मुझे भी पता था , कोइ एक नाम ही उसका होगा.
“एक वो नाम था कौन सा,”
ये समस्या थी. फिर मैने एक दो ओर दिन का समय अपने आप को दिया,
बात यहाँ आकर अटकी थी ,चून्कि मे गणित का विध्यार्थी था ,तो पहेली को उलझा हुआ कैसे छोड सकता था.
एक बार फिर से जोडा- घटाया,गुनाकार किया,फिर से भागाकार भी किया.फिर
समस्या रूपी सवाल थोडा ओर हलका हो गया.
लेकिन अभी तक मे अन्तिम पँक्ति तक नही पहुन्च पाया था,क्युन्की. दो-तीन नाम अभी तक मेरे सामने थे.
“ओर नाम तो कोइ एक ही हो सकता था.”
लेकिन जब मैने थोडी सी तिकडम ओर लगायी.फिर मेरे पास सिर्फ दो नाम बचे.दोनो ही नाम काफी suitable थे,इसलिये अब चुनना थोडा ओर कठिन हो गया था.
लेकिन फिर मेरे दिल ने उनमे से एक नाम को चुना.क्युन्की उसको वो काफी उचित लगा.
तो मैने भी उसको स्वीकार कर लिया.क्युन्की जो नाम मैने छोडा था,आखिरी round मे नही पहुन्च पाया था.जीत उसके काफी करीब थी लेकिन वो उससे पहले ही रन आउट हो गया.
फिर जो final नाम जो चुना वो था, “नेहा”.
उसे मैने मिश्रा जी के टाइटल के नाम जोड कर देखा, “नेहा मिश्रा”.
more than three times i shouted it .there after over and over again, i did the same.
यहाँ भी ठीक ही लग रहा था.
मुझे अन्दर से महसूस हुआ हो ना हो यही है.मेरी तर्क शक्ती इतनी भी खराब नही है.
इतना सब कुछ पता करने के बाद मुझे थोडी सी राहत मिली.क्युन्की मेरे पास उसका एक बायोडाटा कि तरह तैयार हो गया था.and i was dame sure ,all that belongs to her only……to be continued….
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Mishra’s lover

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raaj rathore
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