Thursday, December 14, 2017
Home > Sl.num 16-20 > Sl.num.21 हमेशा एक ही धुन पर साथ साथ बजा करते थे mishra’s lover

Sl.num.21 हमेशा एक ही धुन पर साथ साथ बजा करते थे mishra’s lover

Sl.num.21. Continue…

छुट्टियाँ खत्म होने को थी.
यानी कि “अच्छे दिन्” आने वाले थे.
एक दिन शाम को मे ओर रिम्पी उसकी छत पर बैठे हुये थे.
सिर्फ उस दिन ही नही ,हमारा लगभग रोज का रुटीन था,सबसे उपर वाली छत पर जाकर बैठना ओर मस्ती करना.दरसल रोज शाम को मौसम भी अच्छा हो जाया करता था.ठन्डी ठन्डी हवाये भी चला करती थी ,ऐसे सुहावने मौसम मे समय गुजारने से पुरे दिन भर की बदन जलाने वाली गर्मी को भुल जाया करते थी,
दुसरी बजह ये थी,रिम्पी का घर पुरे मोहल्ले के एक दम बिचो-बिच था.तो जब हम शाम को छत पर जाकर बैठते,पुरे मौहल्ले क नजारा मिल जाया करता था. ओर बिना किसी रिपोर्टर के पूरे मौहल्ले कि खबर का भी आँखो देखा हाल मिल जाता था.इन सब के परे कुछ ऐसा भी था ,मौहल्ले के कुछ बडे लोग ऐसे भी थे जिनकी नजर हम पर ही टिकी रहती थी.बेचारे कही न कही हमसे परेशान भी रहते थे.मेरा मानना ये है उन ये लगता था,कही हम दोनो कि नजरे उनके घर कि तरफ तो नही है.
इसकी एक बजह ये भी हो सकती है,
क्युन्की शरारत तो हम दोनो के चहरे से हमेशा झलकती रहती थी. खैर जैसा वो लोग सोचते थे ,ऐसा कुछ खास नही था.
पर उसमे हम कुछ नही कर सकते थे.
क्युन्की उन लोगो के पास शक नामक एक खास चीज थी,जिसका इलाज पूरी दुनिया मे कही नही है.तो हम दोनो मासूम से बच्चे क्या कर सकते थे.इसलिये हमने कभी भी इस बारे मे सोचा ही नही कि लोग क्या सोचते है.क्युन्कि हमारी खुद कि दुनिया.
लोगो के सोचने से थोडे ही न चलेगी.

“”वेसे भी उन दिनो मे ओर रिम्पी दो गिटार कि तरह थे.हो हमेशा एक ही धुन पर साथ साथ बजा करते थे.””
रोज कि तरह उस दिन भी हम छ्त पर बैठे गप्पे मार रहे थे.यू ही बात चलते चलते अचानक से मेरे दिल मे कुछ ख्याल आया ओर मैने टोपिक बदला …
दरसल मैने उससे ये guess करने को कहा कि किया लगता है”मिश्राजी कहा admission लेगे.”
रिम्पी बिना सोचे समझे एकदम से बोला.”ये भी कोई सोचने की बात है”
मैने कहा”शायद ”
वो बोला,”शक्ल से तो पढने वाली लगती है ना,ओर पढने वालो के लिये यहा एक हि कोलेज है वो भी अपना वाला,समझ गया.”
मे कुछ नही बोला.
उसने बोलना जारी रखा.
भाई मुझे यकीन हि नही पूरा भरोसा है वो अपने कोलेज मे ही आयेगी.
ओर जब भी कभी कुछ ऐसे बोलता था.ना जाने क्यु मेरे अन्दर भी आत्म विश्वास जैसी कोइ चीज जन्म ले लेती थी.
हलान्कि मुझे पता था वो ये सब बाते मेरा दिल रखने ओर मुझे ढान्ढ्स (तसल्ली) बधाने के लिये बोल दिया करता था.इन सब के परे मुझे भी ये सब सुनने मे मजा आया करता था.इसलिये मे ये जान बुझकर उससे पूछा करता था.
अब मे , इन्तजार करने लगा कि जल्दी से कोलेज खुले.admissions हो ओर क्लास बगैराह लगने लगे.इस सोच के पीछे कही न कही मेरा खुद का मतलब छुपा हुआ था
To be continued
.
.
.
Mishra’s lover

Please follow and like us:
raaj rathore
hi, my name is raaj rathore i belongs to shikohabad uttar pradesh. i am the author of this site. this site mainly contain a story which is written by me and i update it time to time that is why this story keep moving. i feel very happy when my readers reads my story and left with like and wonderful comments.thios things also give me motivation to keep writing. writing is my passion somewhere, which i come to konw few years back so i started writing.so my writing passion converted into mishra's lover story and that story converted into mishraslover.com......so that all ...i write it here. so friends be with me and for any query,suggestions and assistance you can contact me through contact us page and feel free to contact us.
http://mishraslover.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)