Thursday, December 14, 2017
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sl,num.014(1) चाँद… क्यूंकी मुझे उसका नाम नहीं पता mishra’s lover

sl.num.14(1).         22feb2012

उस दिन जो भी खयाल आए ,अब उन पर काम करने का समय आया । जैसा

की मुझे already पता है, की बो (चाँद… क्यूंकी मुझे उसका नाम नहीं पता ) 5-6 कोचिंग पढ़ने जाती है, पर

कहा और किस पर ऐसा कुछ नई पता सिर्फ कही जाती है इत्ता ही पता है ।

आगे और भी पता करना था। इसलिए ठीक 04:45 पर मे ,(अगर आप पंजाब

नेशनल बैंक से बड़े बाजार की और मुसकिल से 100 मिटर और बढ़ते हो तो

आपको एक तिराहा मिलता है जिसकी एक गली बड़े डाक खाने से आकार मिलती

है )वहाँ राधे श्याम सिंह अमर सिंह तोमर सर्राफ के नाम से एक ज्वेलर की दुकान

है, वहाँ मे खड़ा हो कर उसका इंतजार करने लगा ।,

ofcourse वहाँ से बो गुजरा करती थी,मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था वहाँ रुकना।

मैंने इधर उधर देखा ऐसा लग रहा था की सब मूझे ही देख रहे है , जैसे

की सबको पता हो की मे यहाँ क्यू खड़ा हु। मेरा अंदाजा था की उसके आने मे

पूरे पाँच मिनट है।पर मुझे महसूस हो रहा था की जैसे पाँच घंटे बाकी है। क्यूंकी एक-एक मिनट,

एक-एक घंटे के बराबर लग रहा था।वहाँ से गुजरने वाला हर एक इंसान से मुझे

डर सा लग रह था ।जैसे की आ कर मुझसे पूछने वाला है,” हाँ भाई यहाँ किसी का

इंतजार कर रहे हो”। अभी भी पूरे तीन मिनट बाकी थे।समझ नई आ रहा था

कि क्या करु । समय गुजर नहीं रहा था और heart beats बढ़ते जा

रहे थे।मेरे पास एक ही ऑप्शन था । मेरा nokia c1 मोबाइल ।टाइम

पास करने के लिए अच्छा ऑप्शन था। उस समय मूझे समय की कीमत पता चल

रही थी,किसी का इंतजार करना कितना मुसकिल होता ,ये भी पता चला ।

अचानक से मेरा ध्यान मोबाइल से हटा ।मैंने अपने दायें तरफ देखा। बो

चली आ रही थी ।अब कोन सा मेरा ध्यान मोबाइल पर टिकने वाला था। पूरा का

पूरा ध्यान उसी पर कनसनट्रेट हो गया ।मेरी सरसरी नजरे उसके चेहरे पर जा

कर रुकी । जैसे सब कुछ उसके बारे मे आज ही पता कर लेगी।अपनी आँखों को

उसकी आँखों पर रोका ।अभी तक शायद उसने हमे देखा नई है । हमेशा की

तरह उसकी नजरे झुकी हुयी थी।उसकी आँखें बड़ी- बड़ी थी,पर एकदम चमकदार,

पलके उसकी लगातार ऊपर नीचे हो रहे थे ।बस उसकी इस हरकत से हमे समझते

देर ना लगी कि मतलब उसको पता है कि मे यहाँ खड़ा हु,और बाकी उसके ब्यवहार

से भी पता चल गया ।क्यूंकी उसने सीधी नजरो से तो नहीं पर निगाहों को तिरछी

कर के लड़कियों वाली अदा मे देखा था ।और कसम से बो जब ऐसे देखती है बहुत

मासूम दिखती है।

खैर अब हम उसकी आंखो से थोड़ा नीचे उतरे और जाकर उसकी गोल-मटोल

छोटी सी नाक पर जा रुके। उसके चेहरे के हिसाब से उसकी नाक ज्यादा बड़ी तो नई थी

,आखों के पास थोड़ी सी बैठी हुयी थी और आगे से थोड़ी सी उठी हुयी थी,लेकिन

उसके चेहरे पर चार चाँद लगा रही थी। मे दायें-बाएँ न जाकर थोड़ा सा नीचे उतरा,

उसके ओठों पर जाकर रुका,अब बखान क्या करे, हम नहीं कह सकते की बो गुलाब

की पंखुड़ी की तरह थे,लेकिन हाँ होठों की लालिमा गुलाब की पंखुड़ी से कम भी नई थी ।इतना

कुछ ही देख पाये हम इस छोटे से समय मे,कि बो मुझे मेरे दायें से पार करने लगी

और अब तक मे उसके चेहरे को एक तरफ से ही देख पाया था।लेकिन अब तक जो

देखा,उसमे मुझे एक पॉइंट भी ऐसा नई मिला जिससे मुझे ऐसा कुछ लगे कि ,,”यहाँ

कुछ खराबी है। ”

खैर जो भी अब बो मेरे आगे निकल चुकी थी। लो मे ये बताना तो भूल ही गया

कि उसकी फ्रेंड भी उसके साथ थी,मे उसके पीछे-पीछे और वो दोनों मेरे आगे-आगे चल

रहे थे और कभी मे उसकी फ्रेंड कि तरफ देखता तो कभी उसकी तरफ लेकिन ज्यादा

समय के लिए मे चाँद पर थहरता था।बो लोग कुछ आपस मे बाते कर रहे थे जो की

मे सुनने की कोशिश कर रहा था । पर मे अपनी कोशिश मे कामयाब नहीं हो पा

रहा था।इसकी दो बजह थी…

पहली-मेरे और उसके बीच की दूरी ज्यादा थी।

दूसरी-बो बहुत धीरे से बोल रही थी ।

पर फिर भी मुझे उसकी आवाज कुछ हल्की-हल्की सरसराहट के रूप मे सुनाई दे रही

थी।पीछे से उसके बाल एक लंबी चोटी के रूप मे थे।जो कि उसकी

कमर से भी नीचे जा रहे थे।हम बस उसके पीछे-पीछे चले जा रहे थे।मुझे बहुत सुकून

मिल रहा था,सोच रहा था की काश ये कभी खत्म ही न हो।ऐसा करते हुये हम पुंजाब बैंक ,स्टेट

बैंक कि गली को क्रॉस करते हुये पथवारी मंदिर वाली गली मे पहुँच गए।उसके बाद धीरे-धीरे

चलते हुये हम लोग आखिरकार पथवारी मंदिर पहुँच गए।अभी उन्होने एक और टर्न

लिया अबकी बार बो लेफ्ट टर्न लेकर खेड़े मुहल्ले की तरफ मूड गयी ।

मे वही रुक गया , न जाने क्यू मेरा आगे जाने का मन ही नहीं किया । वेसे

मेरा उस दिन उसकी कोचिंग पता करने का इरादा था।पर न जाने क्यू मेरे नटखटी

दिल ने कहा बस ,”अब आज नहीं ।”

अब उसके चले जाने के बाद काफी हल्का महसूस हो रहा था।मेरे चेहरे की

सिकन भी खुद ब खुद चली गयी । मैंने घड़ी मे समय

देखा 05:00 हो रहे थे। और बो मेरे सामने लगभग 04:55 पर आई होगी । यानि की

इस सब मे मुश्किल से पाँच मिनट लगे होंगे,मुझे ऐसा लग रह आता जैसे मे बरसो से

उसके पीछे चल रहा था।

आखिर हुमे अपनी कराटे क्लास भी तो जानी थी।क्लास पहुंचे तो पाता चला हम

पूरे पाँच मिनट लेट थे।ड्रेस चेंज किया ।क्लास मे एंट्री कि उसके बाद मे सेनसाई(कराटे

गुरु )ने इनाम के तोर पर बड़ी खातिरदारी कि और खातिरदारी मे ढेर सारी पनिशमेंट मिली।

to be continued…

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mishra’s lover

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raaj rathore
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