Thursday, December 14, 2017
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sl.num.032 मिश्राजी की ये आदत उसकी हसीन आदतो मे से एक थी mishra’s lover

Sl. num. 32. Continue अब उसकी बातो को अनसुना करना जायज ना था,लेकिन अब तक " डर" मेरी रगो मे खून बन कर दौडने लगा था| इसलिये मैने उससे हल्के स्वर

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