Thursday, December 14, 2017
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sl.num.034 दिल से तो बोलना चाह रहा था ,पर जुवान मेरे दिल का साथ नही दे रही थी mishra’s lover

sl num 34.... continue... अन्ततः मैने गेट के पीछे खडे रिम्पी की ओर देखा,वो पहले से ही स्थिति से पूरी तरह बाकिब था,उसने भी अपने हाथो व चेहरे के एक्स्प्रेसन से मुझे बोल के लिये इशारा किया,वो

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sl.num.033 मै उस एह्सास को मह्सूस करना चाहता था,जो उसके छूने के बाद उन किताबो मै आ गया था mishra’s lover

Sl.num.33. continue... मै उस एह्सास को मह्सूस करना चाहता था,जो उसके छूने के बाद उन किताबो मै आ गया था| किताबो को यथास्थान रखने के

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sl.num.29(2/2) साइकिल सवार एक झटके के साथ जमीन पर आ गिरा…mishra’s lover

Sl.num.29(2) चून्कि वो नवयुवक था,रगो मे गर्म खून दौड रहा था,तो ये सब करना उसे लज्जित कर सकता था| अन्तत्: हुआ ये कि जैसे ही मोटर्साइकिल सवार फरराटे के साथ चौराहा पार

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