Thursday, December 14, 2017
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sl.num.035 same day…कलकत्ता जितनी दूर जगह में पहले कभी नही गया था…mishra’s lover

sl num 35. same day ...... continue शाम को जब मै,भैया के घर पर ही बच्चो को ट्यूसन

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sl.num.034 दिल से तो बोलना चाह रहा था ,पर जुवान मेरे दिल का साथ नही दे रही थी mishra’s lover

sl num 34.... continue... अन्ततः मैने गेट के पीछे खडे रिम्पी की ओर देखा,वो पहले से ही स्थिति से पूरी तरह बाकिब था,उसने भी अपने हाथो व चेहरे के एक्स्प्रेसन से मुझे बोल के लिये इशारा किया,वो

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sl.num.033 मै उस एह्सास को मह्सूस करना चाहता था,जो उसके छूने के बाद उन किताबो मै आ गया था mishra’s lover

Sl.num.33. continue... मै उस एह्सास को मह्सूस करना चाहता था,जो उसके छूने के बाद उन किताबो मै आ गया था| किताबो को यथास्थान रखने के

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sl.num.032 मिश्राजी की ये आदत उसकी हसीन आदतो मे से एक थी mishra’s lover

Sl. num. 32. Continue अब उसकी बातो को अनसुना करना जायज ना था,लेकिन अब तक " डर" मेरी रगो मे खून बन कर दौडने लगा था| इसलिये मैने उससे हल्के स्वर

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sl.num.031 यार छोड फिर कभी देखते है… mishra’s lover

Sl.num.31. Continue... me, ".......dame sure...tell?"e Rimpy , "Yes...yes...yes" ऐसी कुछ ओर बातो पर हमारे बीच discussion हुआ,जब उस रोज हम दोनो सुबह टहल के वापस आ रहे थे| आज ना जाने कहा से उसके दिमाग मे ये अटपटी सी बाते आ गयी थी| उपर से उसकी जिद

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