Thursday, December 14, 2017
Home > hindi love story > sl.num.037 मेरी किस्मत उसके साथ-साथ चलती है… mishra’s lover

sl.num.037 मेरी किस्मत उसके साथ-साथ चलती है… mishra’s lover

sl.num.37

first week of september2012……

उस दिन के बाद मे कॉलेज नहीं गया,exam के लिए काफी कम समय बचा हुआ था,और मुझे कुछ ज्यादा किताबे कवर करनी थी।
कुछ किताबे तो मुझे अपनी कोचिंग मे पढ़ने वाली विध्यार्थियों से मिली ,12th class क batch पढने वालो बच्चो को पता चला तो उनमे
से एक लड़के ने मुझे physics और math की दो अलग-अलग बुक लाकर दी ,साथ ही साथ उसने कहा ,” भैया ,बहुत अच्छी किताब है ,आप कोशिश
करना exam से पहले इन्हे solve कर सको /
मैंने खुद जब उन किताबों को पढ़ा तो मुझे भी वो किताबे काफी अच्छी लगी / मेरे पास जो खुद की बुक थी ,उन्हे खत्म करने के बाद मैंने अपने
notes भी खत्म कर लिए थे । इन सब के बाबजूद मैंने उन दोनों किताबों को भी खत्म किया ,जिनमे physics की बुक को 2 बार कवर किया और
math की बुक को 3 बार पूरा solve किया ।


math की किताब तो मुझे इतनी अच्छी लगी की मैंने उसकी हर एक tricks and formula को कंठस्थ कर अच्छी तरह समझ लिया था । जो कि
एकदम सरल भाषा मे थे । उन दिनो में काफी मेहनत कर रहा था,तब तक पढ़ाई करता था जब तक कि पढ़ते-पढ़ते सो ना जाऊ, कई बार ऐसा भी हुआ
जब दिन मे पढ़ते-पढ़ते सो गया ,उसी बीच भैया मेरे घर पर आ गए , उसके बाद मुझे उनके डांट-फटकार भी सुननी पड़ी।
एक बार का मुझे याद है कि मे सुबह जल्दी उठकर वो math वाली किताब लेकर छत पर बैठ गया और decide किया तभी उठूँगा जब इस पूरी
किताब का revision कर दूंगा क्यूंकी उस किताब को पहले भी मे दो बार solve कर चुका था । फिर भी पूरे साढ़े -चार घंटे लग गए ,जबकी मैंने कुछ
सवाल तो यू ही हवा मे भी उढ़ाये थे । दिन के साढ़े दस बजे तक मे उस किताब को खत्म कर पाया , तब तक तो धूप भी चढ़ चुकी थी जिससे बचाने के लिए मैंने
दीवार का सहारा लिया था,अंततः मेरा ध्यान तब जाकर टूटा था ,जब मेरे घर के बगल मे रहने वाली aunty की नजर मुझ पर पड़ी थी । फिर जब उन्होने
मुझे टोका ,तो मैंने सिम्पल सा excuse देकर उन्हे कह दिया ,बस aunty अभी जा ही रहा हु ।
आखिरकार वो दिन भी आ गया जब मुहे कलकत्ता के लिए ट्रेन पकड़नी थी ,कपड़े लगाने से लेकर डॉकयुमेंट की फोटो स्टेट तक की मैंने सारी तैयारी
कर के रख ली थी ।रिम्पी का exam centre पास मे था ,और उसका date of exam भी मुझसे पहले की थी ,इसलिए वो already exam के
लिए निकल चुका था । उसके साथ उसके guardian भी गए थे ।
मेरे mummy मुझे इतनी दूर भेजने के लिए तैयार नही थी,लेकिन फिर भी मैंने mummy को किसी तरह समझाया ,मेरी जाने की जिद के आगे वो
ज्यादा देर ना रुक पायी । अब मम्मी चाहती थी की मे पापा को साथ लेकर जाऊ ,लेकिन मैंने उस बात से भी इंकार कर दिया ,finally मे अकेला जाने के
लिए तैयार था ।
अब मेरे मन मे इच्छा जागी काफी दिन हो चुके है मिश्राजी को एक बार देखा भी नही जाने से पहले एक बार नजर मे उतार लेता हु । उस दिन मेरे साथ
कॉलेज जाने के लिए भी कोई नही था,इसलिए फिर मे अकेला ही कॉलेज पहुँच गया । लाइब्रेरी मे बैठ कर काफी देर तक उसको देखता रहा । फिर उसके
चले जान के बाद चुपचाप से चला आया । उस दिन ना मे उसके पीछे गया , न मैंने और कोई हरकत की ,क्यूंकी उस दिन मेरी सिर्फ उसको देखने भर
तक की इच्छा थी । ठीक उसी तरह जिस तरह हम कभी मंदिर जाते जाते है भगवान के दर्शन मात्र के लिए ,किसी आशा या गुहार के लिए नही। ना जाने कब से
मेरे मन मे एक गलतफहमी ने जन्म ले लिया था ,मानो मेरी किस्मत उसके साथ-साथ चलती है…to be continued
.
.
.mishra’s lover

Please follow and like us:
raaj rathore
hi, my name is raaj rathore i belongs to shikohabad uttar pradesh. i am the author of this site. this site mainly contain a story which is written by me and i update it time to time that is why this story keep moving. i feel very happy when my readers reads my story and left with like and wonderful comments.thios things also give me motivation to keep writing. writing is my passion somewhere, which i come to konw few years back so i started writing.so my writing passion converted into mishra's lover story and that story converted into mishraslover.com......so that all ...i write it here. so friends be with me and for any query,suggestions and assistance you can contact me through contact us page and feel free to contact us.
http://mishraslover.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)