Thursday, December 14, 2017
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Sl.num 25(2/2) यही वो चीजे थी जो उसे बाकी लड्कियो से अलग करती थी mishra’s lover

Sl.num.25(2) 10 aug 2012
” krishna
Janmashthami”

समान प्रक्रिया का पालन करते हुये श्रध्दालुओ का झुन्ड जब मन्दिर के सामने आया उन लोगो के बीच मुझे मिश्रा जी दिखे| मै काफी लम्बे समय से लगातार खडा हुआ था,इसलिये हल्का हल्का घुटनो मे दर्द का एहसास शुरु हो गया था| इसी बजह से ,मे क्रम बदल कर एक -एक पैर पर ज्यादा बजन दे रहा था| मिश्राजी को भीड मे देखकर थोडी सी उर्जा का अनुभव हुआ,ओर मै एकदम सीधा खडा हो गया| मन्दिर की सीढियो के पास जाकर उसने चप्पलो को पहना ओर मेरे सामने थोडी दूरी से होकर ,मेरे दाहिने तरफ आगे की ओर ,मुझसे लगभग 25-30 कदम दूर जाकर खडी हो गयी| उसकी नजरे भी मन्च पर टिक गयी,ओर मेरा चेहरा थोडी देर के लिये मन्च से हटकर उस पर केन्द्रित हो गया| मैने देखा उसके आस पास कुछ ओर लोग भी थे| देखने मात्र से ही लग रहा था वो सब उसके अपने ही रहे होन्गे| जिन लोगो के साथ वो आयी थी,उनमे एक बच्चा भी था,जिसकी उम्र लगभग 10-12 साल रही होगी| वो बच्चा मिश्रा जी के ठीक सामने खडा था,जितने प्यार से मिश्रा जी ने उस बच्चे को दोनो हाथो से पकड रखा था,देखने से ही प्रतीत हो रहा था कि उसके साथ आये लोगो मे,वो सबसे ज्यादा दुलारा,नजदीकी रहा होगा|
उस दिन ,उसने अपने बाल गीले होने की बजह से खोल रखे थे,शायद हाल मे ही स्नान कर के आ रही थी,यानी कि उसने भी व्रत रखा हुआ था| उपर उसने लाल या महरूम कलर का ,कोहनी से नीचे तक की बाजू वाला सूट पहन हुआ था,पैरो मे शायद हल्के काले कलर का कुछ सल्वार जैसा पहना हुआ था,क्युन्की कलर मै ठीक से पहचान नही पाया था| उसके कपडे उसकी सभ्यता ओर सँस्क्रति का व्याख्यान कर रहे थे| पैरो मे साधारण तरह के चप्पल डाले हुये थी| चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान ओर अपार सादगी की भरमार थी| यही वो चीजे थी जो उसे बाकी लड्कियो से अलग करती थी| इन सब छोटी -2 चीजो को मै हमेशा नोटिस किया करता था| हालान्कि ये छोटी-2 ही सही मगर मोटी बाते थी| जो आज्कल की girls मे मिलना खुद मे एक अलग ही बात है
अभी तक मेरा अन्दाजा था कि मै यही आस पास हु ,उसे इस बात का अन्दाजा ना था| इसलिये मैने अपने भीतर निहित शक्ती का इस्तेमाल किया| निहारने की प्रक्रिया के दौरान मैने अपनी आँखो से एक अलग प्रकार की किरणो के सिग्नल्स छोड रहा था ताकि उसका दिमाग उन सिग्नल्स को रीड कर पाये|
पहली कोशिश करने के बाद जब मै नाकाम हो गया| थोडी देर के लिये मै भी मन्च पर चल रहे प्रोग्राम को देखने लगा| लेकिन जब मेरा मन फिर से आकर्शित हुआ ओर मैने सोचा एक बार फिर से कोशिश करता हु| जब मैने उसकी तरफ देखा,वो अपने साथ आये लोगो से नजरे बचा कर मेरी तरफ ही देख रही थी| इस हरकत को अन्जाम देने के लिये उसने उस बच्चे का सहारा लिया हुआ था| वो बच्चे से बात करने के साथ साथ मेरी तरफ भी देखे जा रही थी| यानी की जो थोडी देर पहले मुझे आकर्शण का अनुभव हुआ था,वो उसके आँखो से भेजे गये सिग्नल्स थे जो मेरे दिमाग ने रीड किये थे| ऊपर से उसकी आँखे तो वैसे ही बडी-2 थी,इसलिये एक साथ ज्यादा सिग्नल्स का उत्सर्जन कर सकती थी| उसके ताकने की अदा से लग रहा था कि उसने मुझे बहुत पहले ही देख लिया था| वस अपने साथ आये हुये उन दो – तीन लोगो की नजरो से बचने का इन्तजार कर रही थी| अब उसके चेहरे पर एक खामोश सी हँसी थी,फिर जब मेरी नजर उस पर पडी,तो वो ज्यादा देर तक मेरे सामने ना टिक सकी| फिर हम दोनो एक साथ मन्च की तरफ मुड गये| किन्तु उसकी इस हरकत ने मेरे साहस को बढावा दिया| मै कुछ कदम उसकी ओर बढा,मैने अपने ओर उसके बीच की दूरी को घटाकर 5-10 कदम कर लिया| उससे ज्यादा आगे बढने की हिम्मत मै जुटा नही पाया| इतना करने के बाद्,मै मन्च पर ही लगभग 2-3 मिनट तक देखता रहा|
अब जब मै फिर से उसकी तरफ मुडा|वो वहाँ नही थी,जिन लोगो के साथ आयी थी,उनमे से कोइ भी वहाँ नही था| मैने भीड मे भी इधर्- उधर नजर दौडायी,उनमे से कोइ भी कही नही दिखा| थोडा वहुत आगे पीछे जाकर भी देखा,पर मानो जैसे कुछ असँभव सा सँभव हो गया था|
उसके बाद वो मुझे दिखी ही नही,मेरा दिल बैढ गया | प्रतीत हुआ जैसे कोइ चमत्कार सा था| मैने समय देखा 11:20 p.m. हो रहे थे,इससे पहले मम्मी का फिर से फोने आये मै वहाँ से निकलने लगा| मन्दिर की सीढियो के पास जाकर मैने एक बार फिर से krishna जी की प्रतिमा को प्रणाम किया| सोच तो रहा था कि मै भाग कर घर पहुन्च जाऊ,लेकिन सुबह से गला इतना सूख चुका था कि ठीक से चलने तक की शक्ती नही बची थी| घर पहुन्चने के कुछ 100-200 मीटर पहले मम्मी का फिर से काँल आया,अब चून्कि मे घर पहुन्चने ही वाला था तो मैने रिसीव नही किया……to be continued …….
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.mishra’s lover

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raaj rathore
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