Thursday, December 14, 2017
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sl.num.29(2/2) साइकिल सवार एक झटके के साथ जमीन पर आ गिरा…mishra’s lover

Sl.num.29(2)

चून्कि वो नवयुवक था,रगो मे गर्म खून दौड रहा था,तो ये सब करना उसे लज्जित कर सकता था|
अन्तत्: हुआ ये कि जैसे ही मोटर्साइकिल सवार फरराटे के साथ चौराहा पार करते हुये निकला,स्टेशन की ओर से चले आ रहे साइकिल सवार की साइकिल का अगला पहिया मोटर साइकिल से टकरा गया| परिणामस्वरूप साइकिल सवार एक झटके के साथ जमीन पर आ गिरा| हालान्की मोटरसाइकिल सवार युवक सही सलामत आगे निकल गया,पर जो भी कुछ हुआ था, उसे उस बात का आभास तो हो गया था,फिर भी वो नवयुवक बिना एक बार पलटे हुये अपनी वर्तमान गति को घटाने के वजाय बढाते हुये काफी दूर निकल गया|


अब आस-पास खडे लोगो का ध्यान साइकिल सवार पर केन्द्रित था| वो अब तक उठ कर बैठ चुका था,हालान्कि उसको उठाने का साहस किसी ने नही दिखाया,यहाँ तक कि मैने भी नही| भगवान की दया से उसको सिर्फ कुछ चोटे ही आयी थी,कोइ बडी चोट नही थी| उसकी शक्ल -सुरत व पहनावे को देखकर वो गरीब किसान नजर आ रहा था| उसके चेहरे पर हल्की- हल्की ढाढी थी, माथे पर चिन्ता की लकीरो के निशान साफ झलक रहे थे, आँखो के नीचे काले धब्बे व चेहरे पर झुर्रियो की झलक साफ नजर आ रही थी| उपर उसने हल्के भूरे रन्ग की कमीज व नीचे सफेद रन्ग का पजामा पहना हुआ था| पैरो मे टूटी – फटी साधारण सी चप्पल थी| कुल मिलाकर उसकी दशा दयनीय थी|
मैने जब थोडा ध्यान से देखा,उसकी कमीज जमीन पर रगड के दाँये हाथ की कोहनी पर फट गयी थी,व हल्के – हल्के खून के धब्बे भी लग गये थे| उसके दाँये पैर के घुटने मे भी हल्की सी चोट आयी थी| इस बात का अन्दाजा मुझे तब हुआ , जब वो उठकर बैठा तो अपने हाथ से घुटने को सहला रहा था| उसके बाँयी तरफ उसकी साइकिल जमीन पर पडी हुयी थी|
थोडी दूरी पर खडे आस -पास के लोगो ने अपने शब्दो से उसको ढाँडस बँधाया व उठने को कहा| कुछ लोग उस मोटरसाईकिल सवार को भला बुरा कह रहे थे| फिर एकाएक वो गरीब एक झटके के साथ खडा हुआ,शायद अचानक से उसे कुछ याद आ गया था| दरअसल उसकी साईकिल मे पीछे केरियर पर एक बडी सी पेटी बधी हुयी थी,जो कि उपर से एकदम खुली थी| उस पेटी मे उपर तक ,ताजे व लाल-लाल टमाटर भरे हुये थे,किन्तु अब तक वो सारे टमाटर पूरे चौराहे पर बिखरे पडे थे| आस पास जमा हुयी भीड भी अब अपने गन्तव्य की ओर रवाना हो चली थी| अब वो गरीब दौड-दौड कर टमाटर समेटने मे लगा हुआ था|
वैसे पाली चौरहा कोइ बडा चौराहा तो नही है,इसलिये वहाँ कोइ बड| वाहन तो नही थ, पर मोटर साइकिल्,साईकिल व आँटो रिक्शा वाले अपने वाहनो को टमाटरो से बचा बचा कर निकालने का प्रयास कर रहे थे| फिर भी कुछ टमाटर वाहनो के टायरो की चपेट मे आ ही जा रहे थे| ना जाने क्यू मुझे उस वक्त उस गरीब के चेहरे मे एक असहाय इन्सान नजर आया| मुझे नही पता इतनी देर से मै ये मन्जर क्या सोच कर देख रहा था,लेकिन अब मुझ पर रहा नही गया| मेरे कदम अपने आप उस की ओर बढ गये| मैने अपनी साईकिल ले जाकर रोड के बीचो-बीच आडी खडी कर दी,जिससे रेलवे स्टेशन की तरफ से आने वाले वाहनो को रोका जा सके| अगले ही पल जब उस गरीब का ध्यान मुझ पर गया,उसने भी अपनी साईकिल उठाकर उसी रोड पर दूसरी तरफ से आने वाले वाहनो को रोकने के लिये लगा दी| अब हम दोनो मिल कर टमाटर समेटने लगे|अब जाकर उस गरीब के आत्म विश्वास मे इजाफा हुआ|
उसी दरमियान मेरी नजरे रिम्पी को ढूढ रही थी| मै सोच रहा था अगर वो आ जाता तो हम मे सम्मिलित हो सकता था | but अगले ही पल ,ना जाने कहाँ से दो लड्किया आ गयी| बिना कोइ सँकोच के उन दोनो लड्कियो ने हमारा साथ दिया| आखिरी टमाटर के उठने तक हमने रास्ता रोक कर रखा| उसके बाद मैने उसकी पेटी फिर से उसकी साईकिल पर लदवा दी| वो गरीब तो हमे thank you भी नही बोल पाया,लेकिन उसकी आँखो मे जो इज्जत हमारे लिये झलक रही थी मैने उसका अनुभव किया|
हमारे इतने बचाव के बाद भी,उस गरीब का कुछ नुकसान हो चुका था,क्युन्की बहुत से टमाटर पिचल चुके थे| हो सकता है ये हमारे लिये एक छोटा सा नुक्सान हो ,पर उस गरीब के नुकसान का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है को उसके शरीर पर कुछ चोटे आयी थी लेकिन अपने नुकसान को बढने से बचाने के लिये एक पल के लिये उसका ध्यान उनके दर्द पर नही गया क्युन्की उसके लिये ये दर्द ज्यादा पीडादायक था|


उसके बाद वो आदमी अपने रास्ते चला गया| जाते-जाते अपने चेहरे के हाव भाव से हमारा शुक्रिया अदा कर गया| वो दोनो लडकिया भी मेरे काँलेज की ओर चली गयी|
हल्का सा दु:ख मुझे इस बात का था,आस पास मौजूद इतने लोगो मे से कोइ मदद करने के लिये आगे नही आया,पर खुशी इस बात की थी,खैर कोइ तो था जिसने हमदर्दी दिखायी ओर मदद के लिये सामने आया|
>कितने मतलबी हो गये है हम ?
>जाने क्या हासिल करना चाहते है?
>किस बात की दौड लगी है ना जाने कहाँ जाना है?
>किसी का दर्द नजर नही आता| आपसी लगाब तो जैसे खत्म ही हो गया है|
>किसी की परेशानी नजर नही आती,सिवाय सिर्फ कुछ अपनो के|
इस तरह की तमाम बाते मेरे दिल को छू जाया करती थी|
थोडी देर के इन्तजार के बाद रिम्पी आ गया|फिर हम घर की ओर चल दिये| चलते चलते मैने उसको सबकुछ बताया| वहाँ जो भी कुछ हुआ था पूरी कहानी सुनायी| to be continued .
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.mishra’s lover

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raaj rathore
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