Thursday, December 14, 2017
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sl.num.007 ”शायद जानती है तुझे ” mishra’s lover

sl.num.007 ”शायद जानती है तुझे ”

ओये सुन रिमपी जो भी करना है आधे घंटे के अंदर अपने सारे काम खत्म कर लियो ।
फिर घर चलते है , और तू जहां कही भी है मे तुझे बाहर ही मिलुंगा साइकल स्टैंड के
सामने वाले रूम मे, ठीक है , कॉल कर लियो जब तू फ्री हो जाए । ,” मैंने रिमपी से
फोन पर कहा ।
हम दोनों कॉलेज मे ही थे बो अपने किसी काम मे लगा हुआ था और मे अपने सारे काम
खत्म करके उसका इंतजार कर रहा था।किताबे खोलने का मन तो नहीं हुआ इसलिए
क्लास रूम मे बैठे हुये ही मोबाइल जरूर खोल लिया । यही तो विडम्बना है हम लोगो
की …. जहां मन लगना चाहिए वहाँ नहीं लगता और जहां जरूरी नहीं होता वो करना हमारा
फर्ज बन जाता है।
कभी google तो कभी gmail तो कभी mp3 गाने download….
.. करते हुये 25 मिनट तो यू गुजर गए ।
तभी रिमपी की कॉल आयी।
में ,”हैलो , काम खतम हो गए । ”
रिमपी,”हाँ कहाँ है तू जहां भी हो साइकल स्टैंड पहुँच रहा हु तू भी आजा। ”
में ,” ठीक है तू आ मे वही हु । ”
बो आया मैंने उसकी तरफ साइकल की चाबी बढ़ायी,” ले ताला खोल ।”
उसने मेरी तरफ देखा और बोला तुझे लगता है मे साइकल चलाऊँगा ।
वेसे पता तो मुझे भी था ये नहीं चलाने वाला …… इसे तो सिर्फ साइकल पर बैठना जानता है।
मैंने ही ताला खोला और साइकल स्टैंड के बाहर निकाली ।
मैंने उसके हाथ मे कुछ कागज देखे । मैंने उससे कहा ये तू हाथ मे क्या कागज पकड़े हुये है ।
उसने कहा ,” ये ज्यादा कुछ खास नहीं । पर हाँ इत्ता याद रखियों , तहसील तिराहे पर फोटो
स्टेट कराते हुये चलेंगे । ”
मैंने हामी भर दी ।
मे जैसे ही साइकल पर चढ़ा, बिना सेकंड का इंतेजार किए हुये,वो फटाक से बैठ गया ।
हम पालीवाल चौराहे से चलकर बैजल कनफेक्सनरी होते हुये तहसील तिराहे पहुँच गए ।
तहसील तिराहे पर ही, तहसील के एकदम सामने वाली फोटो स्टेट वाली दुकान पर मैंने साइकल
रोकी ।
यार यहाँ तो ढेर सारी भीड़ है पाँच दस मिनट तो लग ही जाएंगे यहाँ पर ,”मैंने उससे कहा
कोई न वेसे भी हुमे घर जाके कौन से काम करने है ,”उसने कहा
ठीक है पर उन्हे तू कागज तो दे। जल्दी नंबर तो आ ही जाएगा ।
उसके बाद हम अपनी बातों मे व्यस्त हो गए ।
4-5 मिनट मे फोटो स्टेट हो गयी । रिमपी पैसे दे रहा था,मे भी साइकल का ताला खोलने लगा।
मे साइकल अनलॉक कर ही रहा था । देखा तो बीडीएम की भी छुट्टी हो चुकी थी ।
ओये तूने पैसे नहीं दे पाये अभी तक आधा घंटा तो मुझे यहाँ खड़े खड़े हो गया, मैंने रिमपी से
चिल्लाकर कहा ।
अबे रुक न यार, खुले नहीं है मेरे पास,तेरे पास तीन रुपये खुले है। ,”उसने पूछा
मैंने अपनी पॉकेट चेक की मेरे पास भी नहीं थे ।
अबे यार खुले करा ले बगल बाली दुकान से । नहीं तो दुकान बाले भैया से ही कह दे , देने को ।
बो पैसे खुले करने बगल बाली दुकान पर पहुँच गया ।
मे निठल्ला खड़ा, इधर उधर देख ही रहा था। पीछे मुड़ा तो देखा बीडीएम के स्टूडेंट अभी तक
निकल ही रहे थे।
थोड़ी देर बाद मैंने आज फिर से , उस भीड़ मे मुझे वी चाँद सा चहरा नजर आया । मैंने और
ज्यादा गौर से देखा …….हाँ हाँ वही था। थोड़ी देर के लिए फिर से मे उसे यू ही देखता रहा । वो
उधर कनफेक्सनरी की तरफ से ही आ रही थी । मे उसे लगातार देख ही रहा था। फिर अचानक
पता नहीं मेरे दिमाग मे एक पल को क्या आया । मेरी नजरे रिमपी को ढूँढने लगी । वो उधर
पैसे खुले करने के ही चक्कर मे लगा हुआ था। में झपट के उसके पास पहुंचा ।
पैसे खुले हुये ,”मैंने उससे पूछा
रिमपी ने न मे सिर हिलाया ।
मैंने उससे पाँच का सिक्का छिना । तेरी समस्या मे सोल्व करता हु ।
दुकानदार को पाँच का सिक्का पकड़ाया और बोला ,” भैया बाद मे कभी हम फिर फोटो स्टेट करा
लेंगे । ”
इस्स बीच रिमपी,मुझसे कुछ न बोला बस मेरी देखता रहा ।
मैंने उससे कहा अब जल्दी कर साइकल पर बैठ । मैंने झटके से साइकल घुमायी और उसको बैठने
का इशारा करते हुये चल दिया।
अबे तुझे क्या हो गया । आँधी क्यू मचा रखी है।,”रिमपी बोला
मेने कोई जबाब नहीं दिया। पर मे जल्दी इसलिए कर रह था । क्यूंकी मे नहीं चाहता था की वो
चाँद सा चेहरा मुझसे आगे निकल जाये।क्यूंकी उसने मुझे देखा भी नहीं था । मे जल्दी से रोड पर
पहुँच गया और मे उससे आगे ही चल रहा था, एक दो लड़कियां और उसके साथ मे थी पर मे
उसके अलावा किसी को नहीं पहचानता था । मे आज़ाद पेंटर की गली के बाहर जो उल्टे हाथ पर
हनुमान जी का जो मंदिर है मे उसके सामने था और बो लगभग थाने के एकदम सामने थी । और
मे ये gap बनाए रखना चाहता था।
सुन मे तुझसे कुछ भी बोलूँगा पीछे मूड कर मत देखना , चुपचाप बैठे -बैठे सुनते रहना ,”मैंने रिमपी
को धमकी देते हुये कहा, क्यूंकीमुझे पता था बरना वो पीछे जरूर देखेगा ।
रिमपी ने हाँ मे सर हिलाया ।
अब सुन अपने पीछे साइकल पर कुछ लड़कियां आ रही है ।
हाँ आ रही है ,” रिमपी बोला
अरे यार तूने पीछे मूड कर देखा ….. तू माना नहीं ना,तुझसे मैंने माना किया था ना तुझसे ।
okk अब नहीं देखुंगा गलती से घूम गया ।
अपने पीछे 2-3 लड़कियां आ रही है । अब तू पीछे मत मूड जइयो । ठीक है
और उनमे से मे एक को जानता तो नहीं पर पहचानता हु ।
तू कैसे जानता है ,”उसने पूछा
बो मे तुझे बाद मे बताता हु फिलहाल जितना बोलता हु उतना ही सुन और उतना ही कर ……..समझ
गया ।
थोड़ी देर के बाद मे साइकल को थोड़ा स्लो करूंगा । तो सीधी सी बात है बो लड़कियां अपने से आगे
निकल जाएंगी। एक साथ तो नहीं निकलेगी एक एक कर के निकलेगी । तो जब बो बाली लड़की आगे
निकलेगी तो तू उधर देखेगा। और जो तुझे महसूस हो या जो भी दिखे बो मुझे बताना ।
ठीक है ,पर बो कोन सी वाली है मे कैसे पहचानु, मे उसे थोड़े ही जानता हु। ,”बो मुझ पर चिल्ला कर
बोला
मैंने कहा तू बो टेंसन न ले मे कुछ न कुछ इशारा कर दूंगा ।
इतना कुछ बताने मे और सब कुछ सैटल करने मे हम लोग पक्के तालाब पहुँच चुके थे। पीछे वाले
लोग भी पीछे -पीछे आ रहे थे ।
आखिरकार मैंने अब साइकल को धीरे-धीरे धीमा करना शुरू कर दिया , ताकि बो हुमसे आगे निकल
सके। कुछ सेकण्ड्स के बाद मैंने अपनी दायीं तरफ महसूस किया की उनमे
से कोई एक हुमे क्रॉस कर रही थी।
रिमपी बोला ,” यही है ”
(मैंने हल्की सी नजर से पता किया बो नहीं थी)
ना ये नहीं है।
पहली वाली आगे निकल गयी , अभी कोई दूसरा हुमे क्रॉस कर रहा था।
इससे पहले रिमपी कुछ बोलता ,मे बोला ,”हाँ ये है ”
मैंने अपनी साइकल की स्पीड कुछ सेकंड उसके साथ बनाए रखी। उसके बाद बो भी हुमे क्रॉस कर
गयी ।कोई एक और भी साथ मे थी बो भी निकल गयी ।
मे तो किसी और ही दुनिया मे था। तभी कुछ ही क्षड़ों मे पीछे से आवाज आयी।
ओये ये तुझे जानती थी ।
मैंने कहा ,”ना बिल्कुल नहीं , सिर्फ मे उसे पहचानता हु पर जानता नहीं । ”
”लेकिन उसके चेहरे से तो लग रहा था , की जैसे तुझे जानती हो ,”रिमपी बोला
अच्छा ऐसा क्या था,”मैंने अपनी खिंसे निपोरते हुये कहा ।
”वो मुझे नहीं पता , पर मुझे लगा ऐसा क्यूंकी मैंने देखा बो तेरी तरफ देख रही थी और उसके चेहरे
पर हल्की सी मुस्कुराहट और थोड़ी घबराहट भी थी।”,रिमपी बडी ही गहनता के साथ बोला।
अंदर ही अंदर मुझे रिमपी द्वारा कहे हुये शब्द काफी मीठे लगे पर मैंने उसे अपने चेहरे पर नहीं
झलकने दिया।
मे रिमी से बोला ,” तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे की तूने चेहरे पढ्ने मे डिप्लोमा कर रखा है । ”
बो बोला ,”देख भाई तू मान या न मान , पर मुझे यही दिखा, बाकी तेरी मर्जी”
हाँ हाँ ठीक है जो भी हो । ,” मे बोला
तो बता न मुझे ……….जानती थी क्या तुझे ,”बो बोला
नहीं यार बोला ना मैंने नहीं जानती …… और उसके आगे कुछ मत पूछियों …… शाम को जब तेरे घर
आऊँगा ,तो मे बता दूंगा सब कुछ ।
okk,” बो बोला
पर अभी,मे उसका चेहरा पढ़ रहा था , शायद उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मे उससे काफी कुछ
छुपा रहा था।
सामने
देखा तो उधर बो लोग सीधे सब्जी मंडी की तरफ चले जा रह थे।मैंने उनका पीछा ना करते
हुये , हम लोग धोबी गली की तरफ मुड़े औए अपने घर की तरफ बड़े चले गए। to be
continued
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…… mishra’s lover

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raaj rathore
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