Thursday, December 14, 2017
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sl.num.036 मैंने तो आपको तुरंत ही पहचान लिया था ,” वो बोली mishra’s lover

sl.num. 36 mishra’s lover

अगले दिन साइकिल स्टेंड के पास ……

साइकिल स्टेंड के पास ही एक सीडिया है जिन पर मे अक्सर बैठ जाया करता था ।
सबसे पहली बात – बैठनेके लिए बो एक unique जगह थी ,
दूसरी बात ,- वहाँ से कॉलेज की building से बाहर का नजारा काफी अच्छा दिखता था,कौन आ रहा था ,कौन जा रहा है ,अच्छी तरह आसानी
से cover होता था।
तीसरी बात -कॉलेज के भीड़ वाले माहौल थोड़ा ,शांतिपूर्ण जगह थी /
तभी मैंने देखा की लड़की अपनी साइकिल को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है । और रास्ते मे मेरी साइकिल ने उसका रास्ता जाम कर
रखा है । उसने एक हाथ से अपनी साइकिल को थम कर रखा है । और दूसरे हाथ से मेरी साइकिल को रास्ते से हटाना चाह रही है पर जैसे ही
वो थोड़ा सा पीछे बढ़ती उसकी साइकिल का पिछला पहिया,पीछे खड़ी मेरी साइकिल से टकरा जाता ।
मे ये पूरा नजारा देख रहा था ,लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नही की । क्यूंकी ये मेरी समझ से परे था की अगर ये लड़की चाहे तो ,खुद की
साइकिल को स्टेंड पर लगाकर मेरी साइकिल को बड़ी ही आसानी से रास्ते से हटा सकती है लेकिन ,इतना सोचने के लिए उसके पास दिमाग नही
था या फिर वो आलस की बजह से नही कर पा रही थी अब और ज्यादा देर तक यू ही बैठे रहना शायद मुझे शोभा नही देता ,तो मे उठकर पाँच-छ :
सीढ़िया नीचे उतरा ,जिससे मेरे और उसके बीच की दूरी लगभग आधी हो गई ,
मैंने थोड़ी तेज आवाज मे कहा ,” excuse me ”
वो एकदम से पीछे पलटी ,उसने मेरी तरफ देखा । उसको देखकर मुझे लगा शायद इसको पहले भी कही देखा है । पर मुझे एकदम से याद
नही आया ।


जब बो मेरी तरफ देख रही थी ,मैने पूछा ,” वो मेरी साइकिल है ,आपको अपनी साइकिल निकालनी है क्या ?” (वेसे ये वाला मेरा सवाल एकदम
घटिया था,बोलते -बोलते मे एकदम नीचे आ गया । उसने अपने मुह से अभी तक एक शब्द तक नही निकाला था ,फिर भी ,उसको साइकिल बाहर
निकालनी है ,मै अच्छी तरह समझ चुका था )
मैंने अपनी साइकिल का बिना ताला खोले ,उठाकर दूसरी तरफ रख दी ।
वो अपनी साइकिल लेकर जाने लगी । तभी एकदम से मेरे दिमाग मे hit किया ,”ये तो वही लड़की है जिसने मेरी मदद की थी ,जब वो
साइकिल वाला बंदा गिर गया था ,तो उसको support करने के लिए ये लड़की ही मेरी help के लिए आगे आई थी । ”
इससे पहले वो चली जाए ,मैंने बिना एक सेकंड गवाए उससे कहा ,” hello mam ।”
उसने वापस मुड़कर ,मेरी तरफ देखा ,” thank you …..thanks for that day …you helped me।”
उसने भी तुरंत जबाब दिया ,” no no॥thank you तो मुझे आपसे कहना चाहिए ,आपको देखकर ही तो मै आगे आ पायी थी ”
जब वो एकदम से ऐसे बोली तो मे तो पूरा चौक ही गया ,इसका मतलब इसको अभी तक मेरा चेहरा याद है ,सिर्फ एक बार मे ही इसने मुझको
पहचान लिया।
मै फिर बोला ,” आप ही थी ,जिसने मेरी मदद की थी,so thank you so much ,”
वो भी फिर बोली ,” खैर अच्छी बात है,अब मे आपको thank यू बोल रही हु तो मेरा thank you स्वीकार तो कीजिये । ”
फिर मैने मुस्कुरा दिया ।
(मेरी मुस्कुराहट का जबाब उसने भी मुस्कुराकर ही दिया । उससे बात करन अच्छा लगा ,इसलिए मे बातचीत को थोडी और देर continue
रखना चाहता था )
मैंने फिर कहा ,” तो आप भी मेरा thank you स्वीकार कर लीजिये ”
वो एक बार फिर हल्की सी मुस्कुरायी ।
”दरअसल मै उसी दिन आपको thank you बोलना चाहता था ,पर आप अचानक से गायब हो गई थी ,ये कहते हुये मैंने अपनी बात जारी
रखी ।
” हा उस दिन थोड़ी मै जल्दी मे थी ,….लेकिन…फिर भी पूरी तरह से help करवाकर ही वहाँ से गई थी ,”उसने भी अपनी बात जारी राखी
”वेसे sorry to say but अभी मै आपको एकदम से पहचान नाही पाया था ,कुछ सेकंड बाद जाकर मैंने आपको पहचाना ,” मैंने अपनी
बात आगे बढ़ायी
”भला ,मै किसी अच्छे इंसान को इतनी आसानी से कैसे भूल सकती हु ,मैंने तो आपको तुरंत ही पहचान लिया था ,” वो बोली
(शायद उसने मेरी तारीफ की थी ,मुझे तो विश्वास ही नही हुआ ,की किसी लड़की ने मुझे अच्छा कहा था ,या मैंने गलत सुना था ,हो सकता
है वो किसी और के बारे मे
बात कर रही हो । उसकी इस बात पर मै कुछ react नही कर पाया ,तो मै चुपचाप ही खड़ा रहा । )
वेसे भी अब उसको जाना था ,तो आगे मै कुछ नही बोला ….फिर बो पीछे मूड कर जाने लगी ……और बिना एक बार भी पीछे घूमे हुये सीधी
चली गई ।
मै जाकर लाइब्रेरी मे बैठ गया । थोड़ी देर बाद रिम्पी भी आ गया … अब हम दोनों इनतजार करने लगे की कब मिश्रा जी की क्लास छूटे मैंने
साइकिल स्टेंड से ही पता कर लिया था ,की मिश्रा जी और उनकी फ्रेंड आए हुये है ।
मिश्रा जी का क्लास छूटा,लगभग आधे से ज्यादा स्टूडेंट बाहर निकलने के बाद मिश्रा जी और उनकी फ्रेंड बाहर आयी । मुझे थोड़ी देर के लिए
लगा की शायद वो लाइब्रेरी आएंगे । स्पष्टह हम बाहर से तो दिख नही रहे थे। , उसके बाबजूद भी मिश्रा जी ने एक झलक लाइब्रेरी की तरफ ली थी ।
वो चेक कर रही थी की हम वहाँ है या नही?
मैंने और रिम्पी ने बाहर जाने से पहले वही पाँच- मिनट का समय लिया ताकी पूरे कॉलेज से भीड़-भाड़ खत्म हो जाये ।
अब हम दोनों लाइब्रेरी से उठे ,कल की तरह पहले मैंने लोहे के चेनल से साइकिल स्टेंड की ओर देखा । जैसा मैंने सोचा था ,situation
बिलकुल वैसी ही थी ।लगभग पूरा स्टेंड खाली ,मिश्रा जी और उनकी फ्रेंड स्टेंड की ओर जा ही रही थी । 5-10 कदम की दूरी पर हम दोनों चल रहे थे ,
रिम्पी आधे रास्ते से ही main gate की ओर मूड गया । किन्तु आज मेरे जानकारी मे ही गया था ।
मिश्रा & फ्रेंड स्टेंड के पहले छोर के किनारे से होकर enter हो गए ,लेकिन मैंने दूसरा छोर चुना अंदर जाने के लिए । जिससे हुआ ये की जब हम
साइकिल की ओर बढ़ रहे थे ,तो एक दूसरे के एकदम आमने सामने हो गए ।
कल की तरह आज भी ,मै अपनी साइकिल के पास जाकर खड़ा हो गया ,मिश्रा जी अपनी साइकिल के पास आए । अचानक से मिश्रा जी 1-2
कदम पीछे गई । मै डर गया ,मैंने मन मे सोचा ,” क्या हो गया ,मैंने तो कुछ कहा भी नही ,कुछ किया भी नही ।”
मिश्रा जी की फ्रेंड की निगाहे मुझ पर टिक गई,वो सोच रही थी ,की कही मैंने तो कुछ नही कर दिया ।
जबकि इधकर मुझे खुद नही पता था किआखिर हुआ क्या था ।
thank god ,उसके तुरंत बाद ही मिश्रा जी ने अपनी फ्रेंड को इशारे से बताया कि उसकी साइकिल कि सीट पर कोई छोटा सा कीड़ा बैठा हुआ
है। इसके साथ ही मुझे भी पता चल गया , तब जाके मेरी जान मे जान आयी। वरना मेरा चेहरे के expression ऐसे हो गए थे कि मे चिल्ला-चिल्ला
कर कहना चाहता हु ,”मैंने कुछ नही किया …..मे निर्दोष हु …..मुझे ऐसे शक कि नजर से मत देखो । ”
वेसे माहौल तो interesting बन गया था ,वो दोनों लड़कियां एक जैसी ही थी उनमे से एक की भी हिम्मत नही थी कि उस कीड़े को वहाँ से हटा
सके ,और भला मै क्यू हटाता ,मुझे तो उन दोनों के expression से भरे चेहरे देखने मे मजा आ रहा था ,वेसे भी अभी तक किसी ने मुझसे कहा भी
नहीं था ।
वो जो कीड़ा बैठा हुआ था,हमारी local language मे उसे आंखफोड़ा बोलते है और सुना है कि ये सीधा आँख पर ही बार करता है । भले ही
वो कीड़ा जरा सा खतरनाक था पर फिलहाल तो मुझे उस पर प्यार आ रहा था ।


अंतत: मिश्रा जी कि फ्रेंड ने थोड़ी सी हिम्मत करके अपने बेग से उसको हटा दिया ,जिससे वो कीड़ा साइकिल साइड मे jump कर गया ।
जब मिश्रा & फ्रेंड बाहर कि और जाने लगे ,तो पीछे से मैंने अपना रुमाल निकाल कर उस कीड़े के ऊपर डाल दिया। उस कीड़े को रुमाल को कैद
करने के बाद मैंने रुमाल के साथ कीड़े को साइकिल स्टेंड के हैंडल मे लटका लिया । मुझे अच्छे तरह याद है मिश्रा जी कि साइकिल मे लिखा था ….
.”ladybird’……लेकिन आज मैंने देखा
ladybird उस छोटे से कीड़े से डर भी गई थी ।
जब मे बाहर पहुंचा मुझसे ज्यादा रिम्पी खुश दिखायी दे रहा था ,क्यूंकी हो सकता है , मिश्रा जी जब गेट से बाहर निकलते थे तो उसको सामने से
दिख जाया करते थे ,तो थोड़ा वहुत खुशी उसे भी मिल जाती थी । या उसकी खुशी की दूसरी बजह ये थी कि इतनी देर से जो हम साइकिल स्टेंड मे थे ,
तो हमारे बीच कुछ न कुछ खिचड़ी पकी है मतलब बातों का सिलसिला चला है ।
रिम्पी बोला ,” बेटा , आज तो कुछ न कुछ जरूर खिचड़ी पकी है ”
मैंने कहा ,” बेटा, तू सही जा रहा है ,अंदर मजा तो मुझे भी वहुत्त आया है । ”
रिम्पी थोड़ा और exited हो गया ,बोला , ऐसा क्या हुआ ?”
”जो तू सोच रहा हिय वैसा तो बिलकुल नही हुआ है ”ये कहते हुये मैंने रुमाल कि वो पुड़िया उसे दे दी,साथ ही साथ उसको बता भी दिया कि इसके
अंदर एक कीड़ा है और हल्की सी कहानी उसको बता दी । फिर वही पीछे चलते हुये पाली चौराहे तक गए । वहाँ पहले से एक और लड़की खड़ी मिश्रा जी
का इंतजार कर रही थी। उस लड़की को मे काफी दिन से notice कर रहा था । कुछ ज्यादा ही चिपक रही थी । चिपक रही थी मतलब , मिश्रा जी के
साथ आना ,जाना कोलेज मे भी साथ रहना , घर तक साथ जाना बगैरह बगैरह । हो सकता है वो मिश्रा जी कि फ्रेंड हो या फिर फिलहाल बनाने की कोशिश
कर रही हो। उसको पहले कभी इतना साथ नही देखा था।
पहले एक फ्रेंड थी वो कम थी क्या … जो एक और उनके साथ होने मे जुडने वाले थी । समस्या ये थी कि इस तीसरी लड़की को मे थोड़ा थोड़ा जानता
पहचानता था । इसलिए मे नही चाह रहा था कि वो मिश्रा जी का साथ पकड़े ।
फिर वो लड़की मिश्रा जी के साथ साथ नारायण तिराहा ,स्टेट बैंक तक साथ गई लेकिन स्टेट बैंक के बाद बो दूसरी तरफ मूड गई ।
फिर मिश्रा जी & फ्रेंड बड़े बाजार की तरफ से होकर आगे बढ़ने लगे , हम दोनों तो पीछे पीछे चल ही रहे थे ।
मिश्रा जी के घर से 4-5 गालिया पहले ही ना जाने क्यू मिश्राजी रोज के हिसाब से एक अलग गली मे मूड गए । उसकी फ्रेंड भी साथ ही थी । जहां
तक हमारा अंदाजा था , वो गली आगे से बंद नजर आ रही थी । मिश्रा जी & फ्रेंड तो गली के अंतिम छोर पर रुक गए जाकर अब हम दोनों खड़े रह गये ,
जहां से वो गली शुरू हो रही थी । रिम्पी ने तो कहा ,” भाई गली आगे बंद है , और देख तो ले ये यहाँ कर क्या रहे है ।”
(मिश्रा जी ने साइकिल से उतरने के बाद पीछे मुड़कर हमारी तरफ देखा ,यहाँ पर भी उसके expression देखने लायक थे । पता उसे पहले से
ही था कि हम लोग भी ठीक उनके पीछे है । वहाँ बीच रोड मे ,मै ज्यादा देर खड़ा तो नही रह सकता था तो मैंने दायी तरफ गली मे साइकिल मोड दी ।
और 10-12 कदम
आगे बढ़ गया । अब हम एक दूसरे को नहीं देख सकते थे । उसी बीच रिम्पी मुझसे बोले जा रहा था,यार तुझे आगे साइकिल बढ़ाने की क्या जरूरत है उसे पता तो
है ही की हम भी यही पर है ये तूने बिलकुल भी ठीक नही था।
हम वहाँ लगभग 10 मिनट तक खड़े खड़े गप्पे मरते रहे क्यूंकी मुझे पता था कि वो लोग जाएँगे कहा ,घर जाने केलिए इधर से ही निकलेंगे । पर जब
इंतजार करते करते हमने अपना धेर्य खो दिया ,तो मैंने रिम्पी को भेजा कि देखकर आ, आखिर वो लोग वहाँ पर क्या कर रहे है ।
रिम्पी दूर से ही चिल्लाकर बोला ,” ओए यहाँ तो कोई नही है भाई !”
पहले तो मुझे यकीन नही हुआ ,लेकिन जब हमने थोड़ा अंदर जाकर उस गली मे देखा तो वो गली आगे बंद नही थी । उसमे आगे भी जाया जा सकता था ।
बस थोड़ा सा और आगे बढ़ने पर हम मैंन गली मे जा पहुंचे ……. बात सिर्फ इतनी थी की वो गली सुनसान थी उसमे सिर्फ थोड़ी सी चहल पहल थी ।
रिम्पी बोला तू अभी भी कुछ नहीं समझ पाया होगा ,” की वो इधर क्या कर रही थी ,और हम वहाँ खड़े खड़े गप्पे मार रहे थे ,तेरा कुछ नहीं हो सकता भाई!
तेरा कुछ नहीं हो सकता भाई !………………….to be continued
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.mishra’s lover

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raaj rathore
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