Thursday, December 14, 2017
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sl.num.006 लंगोटिया यार mishra’s lover

Sl.num.006

थोड़ा वहत समय और गुजरा…. बड़ी ही
शांति के साथ ….ठीक उसी प्रकार से जिस तरह तूफान से पहले
हर तरफ जो शांति छा जाती है
मेरे बीएससी सेकंड यीयर के अभी तक क्लास शुरू
नहीं हुये थे पर हाँ कॉलेज मे हमारा आना जाना चालू हो गया था,एक
दो दिन छोड़ के लगभग रोज ही किसी न किसी काम से
कॉलेज चले जाते। और अव तो वेसे भी रिम्पी भी मेरे कॉलेज
मे ही आ गया था ।रिम्पी….. यानि की मेरा दोस्त लेकिन वो
मुझसे एक क्लास पीछे था । बारहवी से तो हम दोनों एक
साथ पासआउट हुये थे पर बो एक साल के लिए IIT की
तैयारी के लिए आगरा चला गया था। उसने तैयारी भी काफी
अच्छी की थी। IIT मे भी उसका शायद 2-3 नंबर से ही
मामला सेट होने से ही रह गया था। और हाँ AIEEE मे तो
उसे अवसर भी मिला था पर उसने जॉइन नहीं किया ।
वेसे अगर देखा जाए तो मे उसका और वो मेरा लंगोटिया
यार है।क्यूंकी हम दोनों बचपन से ही एक दूसरे के साथ है ।
वो बात अलग है की बीच मे हमारे स्कूल और कॉलेज अलग
हो गए ,हम एक साथ नहीं पढे पर फिर भी हमारे घर आस
पड़ोस मे ही थी ,उसका तो खुद का मकान था और मे किराये
के घर मे रहता था । बीच मे कई बार हमारी लड़ाई
झगड़े भी हुये , पर कभी एक दूसरे को मारा पिटा नहीं , शायद
यही कमी रह गयी । एक बार के झगड़े के बाद तो हम पूरे दो
साल एक दूसरे से नहीं बोले थे। लेकिन फिर हम दोनों से रहा
नहीं गया ,तो हुम फिर से एक दूसरे से बतियाने लगे ।
खैर जो भी हो बो दिन कमाल के हुआ करते थे। लड़ाई
झगड़े और फिर दोस्ती , बस इसी तरह हमारी दोस्ती बरकरार रही ।
अब दोस्ती की बात क्या करे जनाब हमने अपने अपने रिस्ते
को दोस्ती का नाम दे रखा है , अगर रिस्तों के हिसाब से देखा
जाए तो वो मेरा भतीजा और मे उसका चाचा था , चाचा था
क्या अभी भी हूँ। साथ खेले, साथ पढे ….. इसी कस्मकश मे
हमारा रिस्ता कहा खो गया जो हुमे पता ही नहीं चला ।पर हाँ
इतना तो है कभी कभार हमारे बड़े यानि की या तो उसकी मम्मी
या फिर मेरी मम्मी हुमे हमारा रिस्ता याद दिला देती। बो मेरे
दूर के भाई का बेटा था । पर फिर भी हम एक दूसरे के काफी
करीब थे। हर तरह की बाते हम शेयर करते थे फिर चाहे बो शेयर
करने लायक हो या नहीं, हमे कोई फर्क नहीं पड़ा।….. और अब
तो हमारा कॉलेज भी एक ही था , तो देखा जाए तो धमाल का
समय अभी आया था। क्यूंकी यही वो समय होता है जब हम एक दूसरे
के ज्यादा touch मे रह सकते थे सिर्फ धमाल क्या , मस्ती,मौज ,मजा,
हँगामा और धमाल होना तो सभी चाहिए ,वेसे भी हम अब college मे आ
चुके थे तो आधे से ज्यादा mature तो हम हो ही चुके थे … देखना ये
है की होता है या नहीं ….. to be continued
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.. mishra’s lover

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